झांसी। सेहतमंद होने के लिए आप जो सब्जियां खा रहे हैं, वो आपको बीमार भी कर सकती हैं। जी हां! ज्यादा धूल वाले क्षेत्र की सब्जियों में हैवी मेटल (भारी धातु) जम जाते हैं। भोजन के जरिए ये शरीर में जाकर कैंसर का भी कारण बन सकते हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग द्वारा किए गए शोध में झांसी के कई इलाकों की सब्जियों में डेढ़ गुना तक लेड और 12 गुना तक जिंक पाया गया है।
भट्टागांव, पारीछा थर्मल पावर प्लांट समेत आसपास के इलाकों की सब्जियों के नमूने लेकर पर्यावरण विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों ने प्रयोगशाला में जांच की। इस दौरान जो परिणाम सामने आए वो चौकाने वाले हैं। विभाग की समन्वयक डॉ. स्मृति त्रिपाठी का कहना है कि हाइवे और इसके आसपास धूल में कैंसर पैदा करने वाले लेड, जिंक जैसे हैवी मेटल मानक से ज्यादा होते हैं। क्योंकि, गाड़ियों के टायर, ब्रेक शू घिसने, गाड़ियों के धुएं से हैवी मेटल निकलकर धूल में मिल जाते हैं। इसके अलावा तारकोल के घिसने से भी इसके कण धूल और मिट्टी में घुल जाते हैं। ये खेतों में मिट्टी और हवा के जरिए सब्जियों पर जम जाते हैं। सब्जी को पानी से धाने और उबालने से भी नहीं हटते हैं। सब्जियां खाने से भारी धातु पेट में जाकर कोशिकाओं और ऊतकों को डैमेज करते हैं। इससे बुढ़ापा भी जल्दी आता है। साथ ही पेट की आंत में कैंसर तक हो सकता है। लिवर और किडनी भी डैमेज हो सकते हैं। गंदे पानी से सिंचाई करने से भी हैवी मेटल निकलते हैं और मिट्टी में मिल जाते हैं। फिर ये हैवी मेटल मिट्टी से पौधे में पहुंच जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला में सरसों, मूली, शलजम, पुदीना आदि के नमूनों की जांच की। पौधों 12 गुना तक जिंक, डेढ़ गुना लेड और 15 प्रतिशत ज्यादा तक आयरन की मात्रा पाई गई है। मिट्टी में भी जिंक 50 मिलीग्राम प्रति किलो तक होना चाहिए। जांच में ये 60 मिलीग्राम प्रति किलो तक मिला है। उन्होंने बताया कि अनुमेय सीमा से ज्यादा भारी धातु सेहत के लिए बहुत खतरनाक होते हैं।
इनका पालन जरूरी
- गंदे पानी से सब्जियों आदि की सिंचाई न करें।
- लोग भी बिना जरूरत के वाहनों का इस्तेमाल न करें।
भारी धातु पौधों में होनी चाहिए मिला
जिंक 0.6 5-7
लेड 2 3
आयरन 425 490
(नोट: मात्रा मिलीग्राम प्रति किलो में है।)