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लटका हुआ देखना चाहते थे दरिंदों को, आज मिलेगी कलेजे को ठंडक

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झांसी । वह घड़ी आ गई जिसका सभी को इंतजार था। आज जब आप ये समाचार पढ़ रहे होंगे तब तक बेटी निर्भया के गुनहगार अपनी करनी का अंजाम भुगत चुके होेंगे।
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बृहस्पतिवार को जैसे ही समाचार चैनलों से दोषियों को फांसी तय होने की खबर मिली। ऐसा लगा शहर की महिलाओं की मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई। कई ने अमर उजाला के ऑफिस संपर्क कर अपनी खुशी का इजहार किया। कहा, अपराधियों को समझ लेना चाहिए कि किसी भी बेटी से दरिंदगी पर उनका भी यही हश्र होने वाला है। निर्भया के दोषी कानून के शिकंजे से बच नहीं पाए। उन्होंने फांसी से बचने के लिए हर हथकंडा अपनाया। चार बार फांसी की तारीख तय होकर कानून की पेचीदगियों के चलते निरस्त हुईं। पहली बार 22 जनवरी को सुबह फांसी होनी थी, दूसरी बार एक फरवरी को, तीसरी बार तीन मार्च को और चौथी बार पांच मार्च को। आखिरकार आज उनका अंत हो गया।
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