महानगर के पहूज नदी पर अब गोमती रिवर फ्रंट की तरह से विकास कार्य किए जाएंगे। यहां नदी के दोनों ओर सुंदर रैंप और घाट बनाने के साथ ही लाइटिंग की जाएगी। इसके साथ ही यहां गिरने वाले नालों को टैप किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने डीपीआर बनाने के लिए लखनऊ के क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र को 10 लाख रुपये का बजट दिया है।
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से शुरू होकर झांसी से गुजरने वाली पहूज नदी में गंदगी का अंबार है। नगर निगम ने नदी को बेहतर और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्ताव बनाया था। इसके लिए शहरी आवास विकास मंत्रालय के क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र लखनऊ ने मई में सर्वे करके नगर निगम को रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के तहत यहां पर गिरने वाले नालों की टैपिंग, घाट, रैंप और लाइटें लगाने की योजना बनाई गई थी।
सर्वे करने वाली टीम ने करीब 66 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाने के लिए नगर निगम से धन की मांग की थी। नगर निगम ने पहूज नदी पर होने वाले कामों की डीपीआर बनाने के लिए सर्वे करने वाली संस्था क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र लखनऊ को 10 लाख रुपये का भुगतान किया। अब संस्था दो महीने में डीपीआर बनाकर देगी। जिसके बाद यहां पर स्मार्ट सिटी, 15वें वित्त और अन्य निधियों से काम कराया जाएगा।
नगर आयुक्त पुलकित गर्ग ने बताया कि क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र लखनऊ को डीपीआर बनाने का काम सौंपा है। डीपीआर बनने के बाद रिपोर्ट मिलने पर पहूज नदी पर काम शुरू कराया जाएगा।