आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि घनाराम ग्रुप ने अपने खर्च तो बहुत दिखाए, लेकिन वे इससे जुड़े दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। इतना ही नहीं, उधारी दिखाकर फर्जी बिलिंग भी जमकर की गई। हालांकि, अब भी छापेमारी के दौरान बरामद हुए दस्तावेजों की पड़ताल लगातार जारी है। बड़े पैमाने पर कर चोरी की संभावनाएं जताई जा रहीं हैं।
आयकर विभाग ने घनाराम ग्रुप व उससे जुड़े बिल्डरों के ठिकानों पर बुधवार को सर्च शुरू की थी, जो रविवार को लगातार जारी रही। इस दौरान आईटी टीमों के हाथ कर चोरी से जुड़े तमाम अहम दस्तावेज लगे हैं। सामने आया कि कंपनी ने अलग-अलग लोगों पर अपनी बड़ी उधारी दिखाई। फिर इनसे वापस पैसा लिया, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इसके जरिये कंपनी की कमाई और खर्चों को रूट डायवर्ट कर टैक्स की चोरी की जा रही थी। कंपनी द्वारा अपने खर्च बहुत दिखाए जा रहे थे, परंतु इसके दस्तावेज नहीं मिले।
इतना ही नहीं, पड़ताल में सामने आया कि घनाराम ग्रुप सरकारी ठेके लेकर बांध बनाने और उनकी मरम्मत का काम पिछले बीस साल से करता आ रहा है। इसके अलावा एक दशक से रियल एस्टेट कारोबार में भी है, बावजूद खाते सालों पुराने तरीके से ऑपरेट होते पाए गए। कहीं पर भी एकाउंटिंग नहीं मिली।
नहीं खुली तिजोरी, सीज की
आयकर विभाग की टीम को चार्टर्ड अकाउंटेंट दिनेश सेठी के घर पर इलेक्ट्रॉनिक तिजोरी मिली थी। तमाम कोशिशों के बाद भी आईटी टीम तिजोरी को खोल नहीं पाई थी। इस पर टीम इसे अपने साथ ले गई थी। इसके बाद भी तिजोरी को खोलने की कोशिश की गई, परंतु वह नहीं खुली। इस पर तिजोरी को सीज कर दिया गया। हालांकि, बीच में तिजोरी को कटर से काटने की भी योजना बनाई गई, परंतु तिजोरी में रखे सामान व दस्तावेज नष्ट होने की आशंका के चलते गैस कटर नहीं चलाया गया।