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Jhansi News: गणाचार्य विरागसागर महामुनिराज समाधिस्थ, जैन जगत को अपूर्णीय क्षति

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। राष्ट्रसंत गणाचार्य विरागसागर महामुनिराज की महासमाधि जालना महाराष्ट्र के निकट होने पर जैन समाज शोक में है। आचार्य श्री ने 300 से अधिक मुनि आर्यिका माता को दीक्षित कर जैन धर्म की अपूर्व प्रभावना की और श्रावकों को संयम का मार्ग प्रशस्त किया।
गणाचार्य विरागसागर महामुनिराज अपने संघ के सहित इन दिनों पद विहार करते हुए महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले अंतर्गत जालना गांव में पहुंचे थे, जहां बुधवार की रात (4 जुलाई) करीब 2.20 बजे उनकी हालत बिगड़ गई और कुछ देर बाद उन्होंने शरीर त्याग दिया। जानकारी मिलते ही दूरांचलों से श्रावक-श्राविकाएं अंतिम दर्शन को पहुंचे और आचार्य विराग सागर महामुनिराज की समाधि डोला में सम्मलित होकर अपने गुरु को नमन किया। बीती फरवरी में संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महामुनिराज की समाधि के बाद जुलाई में प्रभावक संत गणाचार्य विरागसागर महामुनिराज की समाधि से जैन समाज स्तब्ध है। गणाचार्य महामुनिराज की समाधि पर अनेकों संतों ने अपनी विन्यांजलि अर्पित करते हुए उनके उत्कृष्ट संयम को जैन जगत के लिए गौरव बताया।
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मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार गणाचार्य विराग सागर महामुनिराज का गृहस्थ जीवन मध्यप्रदेश के दमोह जिला के पथरिया ग्राम में बीता। 2 मई 1963 को पथरिया में कपूरचंद जैन-श्यामदेवी की कोख से जन्मे अरविंद कुमार जैन ने जीवन में संयम का मार्ग धारण किया। 9 दिसंबर 1983 को औरंगाबाद महाराष्ट्र में आचार्य विमलसागर महाराज से मुनि दीक्षा धारण की। सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि जिला छतरपुर में 8 नवंबर 1992 को आचार्य पद प्रदान किया गया और महान संघ के महानायक बने। अनेक साधकों को मुनि आर्यिका एलक, क्षुल्लक क्षुल्लिका दीक्षाएं दीं। अपने उपसंघों में साधुओं को व्यवस्थित कर प्रभावक श्रमण मुनि विशुद्धसागर, मुनि विमर्शसागर, मुनि विषद सागर, मुनि विभव सागर, मुनि विहर्ष सागर, मुनि विनिश्चय सागर, मुनि विमद सागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जो समूचे देश में जैन धर्म की प्रभावना कर श्रावकों को जैन धर्म का मर्म और संयम का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
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विरारी में रुककर समाधिस्थ गुरु को किया नमन
ललितपुर। गणाचार्य विरागसागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका विज्ञिगासा माता ससंष्का विहार बुधवार को पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर से सायंकाल बानपुर के लिए हुआ। वह ग्राम पनारी, रजवारा होते हुए ग्राम विरारी पहुंचीं, जहां रात्रि विश्राम को रुकीं। तभी तड़के विरागसागर महामुनिराज के समाधिस्थ होने की जानकारी मिली तो उन्होंने गुरु को नमन कर उपवास की साधना की। उन्होंने आगे जाने का कार्यक्रम स्थगित करते हुए शुक्रवार सुबह आहारचर्या के बाद वानपुर के लिए विहार करने का निर्णय लिया। अटामंदिर से विहार करते समय मंदिर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, प्रबंधक मनोज जैन, अजय जैन गंगचारी, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, सुरभि जैन, सेजल जैन, श्वाति सिंघई, सुचिता जैन, शालनी जैन आदि मौजूद रहे।
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