अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की छात्रा को 28 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलनी थी, लेकिन अफसर उसे टालते रहे। परेशान छात्रा अपनी बीमार मां को लेकर विकास भवन भी गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हताश होकर छात्रा ने बृहस्पतिवार रात घर के बाहर जामुन के पेड़ पर फंदा लगाकर जान दे दी। पुलिस ने सुसाइड नोट भी बरामद किया है, जिसमें छात्रा ने स्कॉलरशिप न मिलने से परेशान होने की बात लिखी है।
थाना बड़ागांव के बराठा गांव निवासी संजना कुशवाहा (18) पुत्री कालका प्रसाद बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से स्पोर्ट कोटे से स्नातक कर रही थी। उसने एनसीसी कैडेट भी थी। पिता खेती-किसानी करते हैं, लेकिन अधिक जमीन न होने से आय सीमित है। संजना ने आगे की पढ़ाई जारी रखने को छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे छात्रवृति नहीं मिली। इससे वह परेशान थी। बृहस्पतिवार को उसने परिवार के साथ खाना खाया और कमरे में सोने चली गई। आधी रात के बाद संजना घर के पास जामुन के पेड़ से फंदा बनाकर झूल गई। शुक्रवार की सुबह पेड़ से उसका शव लटका देख परिजनों में चीख-पुकार मच गई। सीओ सदर स्नेहा तिवारी के मुताबिक छात्रा के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। छानबीन कराई जा रही है।
मैंने बहुत मेहनत की...झूठ बोलते रहे अफसर
संजना पढ़ने-लिखने में मेधावी थी। परिजनों का कहना है कि संजना पढ़ाई के साथ खेलकूद में तेज थी। वह एनसीसी कैडेट थी। वह पुलिस में भर्ती होना चाहती थी। इसके लिए वह मेहनत भी करती थी। उसे छात्रवृत्ति से आस थी कि इसकी बदौलत वह पढ़ाई आगे जारी रख सकेगी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के अफसर छात्रवृत्ति के लिए उससे लगातार झूठ बोल रहे थे।
संजना ने सुसाइड नोट में अपना यह दर्द साझा किया। सुसाइड नोट में संजना ने लिखा कि मैं यह नोट इसलिए लिख रही हूं ताकि पता चल सके कि मैंने यह कदम क्यों उठाया। मेरी छात्रवृति 28 हजार रुपये आनी थी, मगर नहीं आई। कॉलेज में सबकी आ चुकी है। इसके लिए विकास भवन तक हो आई। उन्होंने बोला तुम्हारे आधार कार्ड की फीडिंग नहीं है। बैंक जाने पर मालूम चला कि आधार फीडिंग पहले से ही हो चुकी। दो माह में स्कॉलरशिप आने की बात कही गई। मैं विकास भवन मम्मी के साथ गई। उनकी तबीयत खराब थी, लेकिन मैं लेकर गई। हमें अंदर से घुटन होने लगी। हमने बहुत मेहनत की थी। हो सके तो माफ कर देना, इस कदम के लिए।