झांसी। वन विभाग ने हाल ही में वन्य जीवों की गणना कराई है, जिसमें सामने आया है कि यहां गेंडे के चार बच्चे मौजूद हैं। जबकि, नीलगाय व वनरोज की बढ़ती आबादी लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इसके अलावा हिरण विलुप्त हो गए हैं।
वन विभाग द्वारा हर तीन साल में वन्य जीवों की गणना कराई जाती है। विभाग द्वारा हाल ही में कराई गई गणना में सामने आया है कि जिले में हिरण, तेंदुआ आदि वन्य जीव विलुप्त हो गए हैं। जबकि, नीलगाय व वनरोज की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। यहां जंगलों में 4500 से ज्यादा वन रोज और 2100 से अधिक नीलगाय मौजूद हैं। इसके अलावा यहां की नदियों से घड़ियाल भी गायब हो चुके हैं। जबकि, एक समय बेतवा नदी में नोटघाट पुल के इर्दगिर्द आसानी से घड़ियाल देखने को मिल जाते थे। मगरमच्छ भी केवल 68 ही बचे हैं। वहीं, वहीं मोर, लंगूर और बंदर जिले में बहुतायत संख्या में पाए गए हैं।
बता दें कि वन्य जीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी वन विभाग पर है। विभाग द्वारा सात वन रेंजों में इनका संरक्षण किया जा रहा है।
हर तीन साल में वन्य जीवों की गणना की जाती है। गणना में जो जीव विलुप्त होते पाए गए हैं, उनके संरक्षण के उपाय विभाग की ओर से किए जाएंगे।
- एमपी गौतम, डीएफओ