झांसी। 40 फीसदी हेल्थ केयर वर्कर मरीज के इलाज के दौरान सही से हाथ साफ नहीं करते हैं। इससे न सिर्फ एक से दूसरे मरीज में क्रॉस इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। बल्कि, खुद डॉक्टर, स्टाफ और उनके परिजन भी बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन की गिरफ्त में आ सकते हैं। झांसी मेडिकल कॉलेज समेत देश के 92 चिकित्सा संस्थानों द्वारा साथ मिलकर किए गए शोध में ये परिणाम सामने आए हैं।
इस संयुक्त स्टडी का नोडल केंद्र पुडुचेरी के जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान है। झांसी मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी कोविड डॉ. अंशुल जैन, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. नमिता श्रीवास्तव और डॉ. मांडवी अग्रवाल इस शोध कार्य में शामिल रहीं। डॉक्टरों के मुताबिक स्टडी में देखा गया कि हेल्थ केयर वर्कर हाथों की स्वच्छता का कितना पालन करते हैं। इसमें 40 फीसदी डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ मरीज के इलाज के दौरान हाथों की साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते मिले। बताया कि एक से दूसरे मरीज के चिकित्सीय परीक्षण से पहले हाथों को सैनिटाइज करना या धोना जरूरी होता है। वरना एक से दूसरे मरीज में क्रॉस इंफेक्शन फैल सकता है। इससे मरीज की हालत और बिगड़ सकती है। चूंकि, अस्पताल में भर्ती मरीज के शरीर में बैक्टीरिया होते हैं। ऐसे में खुद डॉक्टर और स्टाफ को मरीज से बैक्टीरियल व वायरल इंफेक्शन होने का खतरा हर समय बना रहता है। इससे संक्रमण की एक लंबी चेन तैयार हो सकती है, क्योंकि, हेल्थ केयर वर्कर से उनके परिजन और संपर्क में आने वालों को ये इंफेक्शन होता चला जाता है। अगर खून से होता हुआ ये इंफेक्शन हार्ट तक पहुंच गया, जिसे इंफेक्टिव एंडो कार्डियाटिस कहते हैं तो स्थिति गंभीर हो सकती है। ये शोध कार्य देश के माइक्रोबायोलॉजी के प्रतिष्ठित जनरल में इस साल अक्तूबर के अंक में प्रकाशित हो गया है। बताया गया कि जल्द ही आईसीएमआर इसको लेकर रिपोर्ट जारी करने जा रहा है।
सरकारी अस्पतालों से कारपोरेट हॉस्पिटल की हालत बेहतर
स्टडी में ये सामने आया है कि सरकारी चिकित्सालयों के मुकाबले कारपोरेट हॉस्पिटल में हेल्थ केयर वर्कर्स हाथों की सफाई ज्यादा करते हैं। जबकि, कारपोरेट को छोड़कर अन्य निजी अस्पतालों में स्थिति तो सरकारी अस्पतालों से भी खराब है। वहीं, दक्षिण की तुलना में उत्तरी भारत में इस पर कम ध्यान दिया जाता है।
ये इंफेक्शन होने का रहता डर
- निमोनिया
- डायरिया
- कोविड
- इंफेक्टिव एंडो कार्डियाटिस
92 चिकित्सा संस्थानों ने मिलकर ये स्टडी की है, जिसमें एम्स भी शामिल है। शोध में सामने आया कि 40 फीसदी हेल्थ केयर वर्कर्स मरीज के इलाज के दौरान सही से हाथ साफ नहीं करते हैं। इससे डॉक्टर, स्टाफ को खुद और उनके संपर्क में आने वालों को भी बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। अक्तूबर के अंक में स्टडी प्रकाशित हुई है। - डॉ. अंशुल जैन, नोडल अधिकारी कोविड, मेडिकल कॉलेज।