आम तौर पर नवंबर महीने से कोहरे की शुरूआत मानी जाती है। इसके मुताबिक रेलवे अपनी तैयारियां आरंभ करता है लेकिन, इस दफा 11 अक्तूबर से ही झांसी-बीना, झांसी-धौलपुर, झांसी-भीमसेन के बीच कोहरा नजर आने लगा।
इस दफा कोहरे ने करीब पंद्रह दिन पहले ही झांसी रेल मंडल में दस्तक दे दी। कोहरे की चादर के असर से ट्रेनों की रफ्तार बिगड़ने लगी हालांकि रेल अफसरों का कहना है कोहरे से निपटने के इंतजाम पहले ही पूरे किए जा चुके। झांसी मंडल के तीन सौ से अधिक लोकोमोटिव में जीपीएस आधारित फॉग डिवाइस लगाया गया है।
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आम तौर पर नवंबर महीने से कोहरे की शुरूआत मानी जाती है। इसके मुताबिक रेलवे अपनी तैयारियां आरंभ करता है लेकिन, इस दफा 11 अक्तूबर से ही झांसी-बीना, झांसी-धौलपुर, झांसी-भीमसेन के बीच कोहरा नजर आने लगा। इसके चलते ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ने लगा। गोंडवाना समेत अन्य सवारी गाड़ियां प्रभावित हुईं।
वहीं, कोहरे के दौरान दृश्यता बरकरार रखने के लिए रेल इंजनों पर एंटी फॉग डिवाइस लगाए गए हैं। मंडल के तीन सौ लोको पर डिवाइस लगाए गए हैं। यह जीपीएस प्रणाली से जुड़ा रहेगा। इसकी मदद से कोहरे में आसानी से क्रॉसिंग एवं सिग्नल मिलेगा। यह डिवाइस शताब्दी एक्सप्रेस, पंजाब मेल, जीटी एक्सप्रेस, गोवा एक्सप्रेस, श्रीधाम एक्सप्रेस समेत अन्य लोकोमोटिव पर लगाए गए हैं। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह के मुताबिक कोहरे को लेकर लोको पायलटों को निर्देश जारी किए जा चुके। अन्य जरूरी उपाय भी किए गए हैं।
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डबल डिसटेंस लाइन पर नहीं बजाएंगे जाएंगे पटाखे
कोहरे के दौरान लोको पायलट पटरी पर पटाखे बजाते हुए चलते हैं, जिससे सिग्नल की धुंध छट जाती है लेकिन, अब डबल डिसटेंस लाइन में इंटरलाकिंग सिग्नल हो जाने अब यहां पटाखे बजाने की जरूरत नहीं रह गई। अब सिर्फ सिंगल लाइन में ही लोको पायलट को इसे बजाना होगा।