झांसी। पौधरोपण के लिए तीन साल पहले खोदे गए थे गड्ढे। विभाग ने गड्ढे खोदने के लिए जिस जीसीबी और ट्रैक्टर के नंबर रिकार्ड में दिए किए थे वह बाइक, स्कूटर और मोपेड के निकले थे। जांच हुई तो इस पूरे मामले को लिपिकीय त्रुटि बताकर फाइल बंद कर दी गई। लेकिन अब शासन ने हाईपावर कमेटी ने इस पूरे मामले की दोबारा से जांच कराने के आदेश कर दिए हैं। माना जा रहा है कि अब अफसरों पर कार्रवाई होगी।
वन विभाग द्वारा मानसूनी सीजन में हर साल बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाता है। पौधों की ढुलाई व गड्ढे खोदने के लिए भाड़े पर ट्रैक्टर व जेसीबी मशीन लगाई जाती हैं। साल 2017 से लेकर 2019 तक भाड़े पर लगाई गईं गाड़ियों में बड़ा घपला पकड़ा गया था। गड़बड़झाला जिले की सात में से पांच रेंज मऊरानीपुर, गरौठा, मोंठ, बबीना व चिरगांव में हुआ था। इन रेंजों में गड्ढे खोदने और पौधों की ढुलाई के लिए जिन जेसीबी व ट्रैक्टरों का इस्तेमाल दर्शाया गया था, महालेखाकार द्वारा की गई वाहनों के नंबरों की जांच में वे मोपेड, बाइक व स्कूटर के निकले थे। 24 गाड़ियों में ये खेल हुआ था, जिन्हें चार लाख रुपये के भाड़े का भुगतान किया गया था। यह खेल बुंदेलखंड के ललितपुर और हमीरपुर जनपद में भी हुआ था। ललितपुर में 11 और हमीरपुर में 17 ऐसी गाड़ियां पकड़ी गईं थीं, जिन्हें कागजों में ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन दर्शाया गया था, लेकिन बाद में उनके नंबर दोपहिया वाहनों के पाए गए थे। इन वाहनों के नाम पर साढ़े चार लाख रुपये का भुगतान दर्शाया गया था।
गड़बड़ी सामने आने के बाद इसकी जांच शुरू कर दी गई थी। इसके लिए मई 2021 में शासन की उच्च स्तरीय टीम भी झांसी, ललितपुर व हमीरपुर पहुंची थी। टीम ने मौके पर जाकर जमीनी हकीकत देखी थी। साथ ही भुगतान से जुड़े अभिलेख भी खंगाले थे। तब यह मामला प्रदेश भर की सुर्खियों में रहा था। माना जा रहा था कि इस घोटाले में विभाग के बड़े अफसरों से लेकर निचले स्तर के कर्मचारियों तक पर गाज गिर सकती है। लेकिन, शुरुआती तेजी के बाद मामले को बट्टे खाते में डाल दिया गया। जांच में सभी कर्मचारियों को क्लीन चिट देते हुए घोटाले को लिपिकीय त्रुटि करार दे दिया था। लेकिन, अब एक बार फिर पौधरोपण के नाम हुए इस घोटाले का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। वन मंत्री डा. अरुण सिंह ने घोटाले की जांच के आदेश कर दिए हैं। वन विभागाध्यक्ष ममता संजीव दुबे की अगुवाई में हाई पावर कमेटी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन के इस फैसले से वन विभाग में हड़कंप की स्थिति है। शासन को रुख को देखते हुए घोटाले के जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
इस मामले की शासन की उच्चस्तरीय कमेटी द्वारा पहले जांच की जा चुकी है, जिसमें लिपिकीय त्रुटि सामने आई थी। पड़ताल में मौके पर काम होना भी पाया गया था। हालांकि, अब शासन ने इस मामले की दोबारा से जांच के निर्देश दिए हैं।
- एमपी गौतम, जिला वनाधिकारी