झांसी। कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों...कवि दुष्यंत की ये रचना अभावों में पल रही झांसी की दीपशिखा पर बिल्कुल सटीक बैठती है। मल्लखंभ की इस खिलाड़ी को कुछ दिन पहले निर्णायकों ने फेल साबित कर खेलो इंडिया यूथ गेम्स की प्रदेश स्तरीय चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। लेकिन दीपशिखा ने अपने साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ झांसी से लेकर लखनऊ खेल निदेशालय तक आवाज उठाई और चुनौती दी कि प्रतियोगिता दोबारा कराई जाए। मंगलवार को खेल विभाग की निगरानी में प्रतियोगिता दोबारा कराई गई। इस बार दीपशिखा ने बेहतरीन प्रदर्शन के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। दीपशिखा अब छह फरवरी से उज्जैन में होने वाली खेलो इंडिया यूथ गेम्स में यूपी की टीम में खेलेंगी।
उज्जैन में छह से 10 फरवरी तक आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की मल्लखंभ प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए तीन दिसंबर 2022 को उत्तर प्रदेश की टीम की चयन प्रक्रिया झांसी में आयोजित की गई थी। दीपशिखा ने भी इसमें हिस्सा लिया था। लेकिन निर्णायकों ने उसे फेल कर टीम से बाहर कर दिया। लेकिन दीपशिखा को अपने हुनर और काबलियत पर पूरा यकीन था। ऐसे में उसने चयन समिति पर पक्षपात करने और रुपये मांगने के साथ ही मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए डीएम झांसी और खेल निदेशालय लखनऊ में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।
उसकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निदेशालय द्वारा जांच समिति का गठन कर दोबारा से ट्रायल कराने का आदेश दिया था। इस दौरान आरोपी कोच रवि परिहार और अनिल पटेल निलंबित कर दिए गए थे। मंगलवार को मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में चयन प्रक्रिया आयोजित की गई। बिलासपुर के तकनीकी समिति के सदस्य राजकुमार शर्मा एवं भारतीय मल्लखंभ महासंघ राजस्थान के गोपाल सिसोदिया की निगरानी में चयन प्रक्रिया आयोजित की गई। इस दौरान दीप शिखा ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए प्रदेश की टीम में दूसरा स्थान हासिल किया है।
अभाव में जी रहा परिवार
झांसी। दीपशिखा झांसी के बिपिन बिहारी कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा है। इनके पिता इलेक्ट्रीशियन हैं। इनके दो भाई और एक बहन है। पिता की छोटी सी कमाई में सभी भाई-बहन अपना भविष्य तलाश रहे हैं। दीपशिखा शुरू से ही मल्लखंभ में आगे है। वह चेन्नई, छत्तीसगढ़, गोवा, हरियाणा और शामली में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर स्थान पा चुकी है। दीपशिखा बताती हैं कि उनका परिवार अभाव में जिंदगी जी रहा है, लेकिन अन्याय के खिलाफ लड़ने की ताकत उसे अपने पिता से मिली है। निर्णायकों के खिलाफ इस लड़ाई में पिता ने उसका पूरा साथ दिया।