झांसी। कोरोना काल में फीस जमा करने वाले झांसी के 2.56 लाख बच्चों को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से राहत मिली है। अब इन छात्र-छात्राओं की फीस स्कूल द्वारा या तो वापस की जाएगी या फिर समायोजित करनी होगी।
कोरोना काल में स्कूल बंद होने के बावजूद छात्र-छात्राओं से फीस ली गई थी। परिजनों ने इसका काफी विरोध किया था। साथ ही मांग की थी कि महामारी की वजह से कारोबार, रोजगार सब कुछ प्रभावित हुआ है। ऐसे में स्कूल फीस माफ करें। मगर स्कूलों की ओर से हर महीने की फीस ली गई। अमर उजाला ने भी इस मुद्दे पर लगातार खबरें प्रकाशित की थीं। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना काल में स्कूलों की ओर से जमा कराई गई फीस में से 15 फीसदी की कटौती करने के निर्देश दे दिए हैं। वर्ष 2020-21 के आंकड़ों को देखें तो कक्षा एक में 36,973, दो में 43,086, तीसरी में 43,962, चौथी में 42,590, पांचवीं में 40,915, छठवीं में 32,860, सातवीं में 33,986, आठवीं में 35,398, नवीं में 27,517, 10वीं में 29,960, 11वीं में 24,708, 12वीं में 24,884 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत थे। हालांकि, इनमें बेसिक, माध्यमिक एवं सहायता प्राप्त राजकीय विद्यालयों में 1.60 लाख विद्यार्थियों ने पढ़ाई की। इन छात्र-छात्राओं से कोई फीस नहीं ली जाती। ऐसे में निजी स्कूलों में लगभग 2.56 लाख छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई की। अब कोर्ट के आदेश के बाद इन छात्र-छात्राओं की या तो स्कूलों को फीस वापस करनी होगी या फिर समायोजित होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट के आदेश का पालन कराया जाएगा।
1800 से 9000 रुपये तक लौटाए जा सकते
झांसी में कक्षा एक या इसके आसपास की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं से ज्यादातर निजी स्कूलों द्वारा कम से कम एक हजार रुपये फीस हर महीने ली जाती है। जबकि, 12वीं के छात्रों से लगभग पांच हजार रुपये प्रतिमाह फीस स्कूल लेते हैं। कोर्ट ने कोविड काल में जमा फीस में से 15 फीसदी लौटाने के निर्देश स्कूलों को दिए हैं। ऐसे में 1800 से लेकर 9000 तक फीस वापस या समायोजित हो सकती है।