बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के वित्त विभाग ने फिर से बड़ी चूक करते हुए लगभग 150 नियमित कर्मचारियों की गलत सैलरी भेज दी। कर्मचारियों के मोबाइल पर जब गलत सैलरी पहुंचने का संदेश आया तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन कर्मचारियों ने एक दूसरे को फोन मिलाना शुरू कर दिया। मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो बैंक से बात कर सैलरी में संशोधन कराया गया। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के वित्त विभाग में लापरवाही चरम पर है। तीन महीने में ही वित्त विभाग ने दूसरी बड़ी गलती करते हुए लगभग 150 नियमित कर्मचारियों की सैलरी गलत भेज दी। किसी की सैलरी 59 हजार थी तो उसके खाते में 30 हजार पहुंच गए, वहीं किसी की 30 हजार थी तो उसके खाते में 59 हजार पहुंच गए। किसी के कम तो किसी के ज्यादा पैसे आने से हड़कंप मच गया। आनन-फानन कर्मचारियों ने एक-दूसरे से फोन पर बात करनी शुरू कर दी। मामला कुलपति तक पहुंचा तो उन्होंने वित्त विभाग के स्टाफ को तलब कर पूछताछ की। कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने बताया कि बैंक में ऑनलाइन पेमेंट भेजा जाता है। नियमित कर्मचारियों के नाम और अकाउंट नंबर में ऊपर नीचे होने से सैलरी गलत पहुंच गई थी। बैंक से सुधार कराकर सही सैलरी भेज दी गई है। गौरतलब है कि वित्त विभाग ने इससे पहले दिसंबर की सैलरी दो बार भेज दी थी। गेस्ट फैकल्टी को एक लेक्चर के हिसाब से किया भुगतान बीयू ने गेस्ट फैकल्टी को एक-एक लेक्चर के हिसाब से भुगतान कर दिया है। गेस्ट फैकल्टी को प्रति लेक्चर के हिसाब से भुगतान होता है। ज्यादातर गेस्ट फैकल्टी प्रतिदिन दो ही लेक्चर ले पाते हैं। लॉकडाउन के दौरान विश्वविद्यालय बंद होने से पढ़ाई नहीं हुई। चूंकि, इनका कोई मानदेय निर्धारित नहीं है। फिर भी रोज एक लेक्चर के हिसाब से भुगतान किया गया है। कुलपति ने बताया कि अभी वित्त समिति के प्रत्याशा में न्यूनतम भुगतान कर दिया है। अब यह मामला वित्त समिति में ले जाएंगे। वहां पर विचार-विमर्श करने के बाद नियमों के अंतर्गत अगर पैसा बढ़ सकता है, तो और भुगतान किया जाएगा। कोरोना से लड़ाई के लिए बीयू देगा 8.65 लाख बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में 8.65 लाख रुपये जमा करेगा। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के नियमित और स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षक, कर्मचारियों ने अपनी एक-एक दिन की सैलरी दी है।