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किस्तों में रिश्वत लेकर बनाए गए फर्जी शिक्षक, आजमगढ़ में ही बने थे जाली प्रमाण पत्र

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झांसी। फर्जी नियुक्ति पत्रों के आधार पर झांसी में ज्वाइन करने वाले पांच शिक्षकों के मामले में नित नए खुलासे हो रहे हैं। सोमवार को पुलिस ने आजमगढ़ और कौशांबी के जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया है वह इस पूरे नेटवर्क की एक बड़ी कड़ी माने जा रहे हैं। पुलिस पूछताछ में मालूम चला है कि यह लोग सरकारी स्कूलों में नौकरी दिलाने के नाम पर रिश्वत भी किस्तों में ले रहे थे। किसी से पहली किस्त पचास हजार की ली जबकि किसी से 30 हजार की। आजमगढ़ में ही जाली प्रमाण पत्र बनाए गए थे। माना जा रहा है कि झांसी के साथ ही पूर्वांचल के कई जिलों में इन लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी लगवाई है।
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जनपद के तीन सरकारी विद्यालयों में पांच लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्रों के सहारे शिक्षक की नौकरी करते पकड़ा जा चुका है। इसके बाद से ही पुलिस इस रैकेट का खुलासा करने में जुटी थी। इस मामले में पुलिस के हाथ सोमवार को बड़ी सफलता लगी। गरौठा थाना पुलिस ने फर्जीवाड़े के रैकेट के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया। पकड़ा गया जीत नारायण मौर्य आजमगढ़ में विद्यालय का संचालन करता है। वह इस खेल के मास्टर माइंड से सीधे जुड़ा हुआ है। जबकि, दूसरा आरोपी कौशांबी निवासी कैसर अब्बास रिजवी प्राइवेट कॉलेजों में कमीशन लेकर बच्चों का एडमिशन कराने का काम करता था। वह जीत नारायण के संपर्क में आ गया था।
जांच में सामने आया कि रैकेट के सदस्य किस्तों में रिश्वत लेकर जाली दस्तावेजों के बूते पर विभिन्न विभागों में नौकरी लगवाते हैं। लेकिन फिलहाल शिक्षा विभाग का खुलासा हुआ है। जिन लोगों पर फर्जी शिक्षक होने का आरोप लगा है पुलिस उन्हें पहले ही गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है। पुलिस पूछताछ में पता चला था कि इन सभी पांच लोगों ने भी 78 लाख रुपये दिए थे। पूरी की पूरी रकम किस्तों में अदा की गई थी। पकड़े गए दोनों झांसेबाज अपना हिस्सा काटकर मास्टर माइंड को पहुंचा देते थे। आशंका यह भी जताई जा रही है कि फर्जीवाड़े के इस रैकेट के सदस्य पूर्वांचल व पश्चिम के कई जनपदों में फर्जी शिक्षकों की तैनाती करा चुके हैं। माना जा रहा है कि मास्टर माइंड की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के हाथ इस संबंध में अहम सुराग लग सकते हैं। वहीं, अन्य जनपदों में भी फर्जीवाड़े की आशंका के चलते माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से भी पड़ताल की जा रही है।
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पकड़े गए तो वापस होगा पूरा पैसा
झांसी। जिन लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र के आधार पर तैनात कराया जाता था उनसे कहा जाता था कि वह कभी नहीं पकड़े जाएंगे। विभाग में जो भी दस्तावेज होगा वह मुकम्मल होगा। यह लोग अफसरों से दोस्ती होने की बात कहकर अपना प्रभाव दिखाते थे लिहाजा लोग आसानी से विश्वास भी कर लेते हैं। इसी का यह लोग फायदा उठाते रहे। जो लोग परीक्षा देने के बाद शिक्षक नहीं बन पाते थे उन्हें अपना टारगेट बनाकर भर्ती कराने का झांसा देते थे।
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