फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फिर महंगा हुआ दवाओं का कच्चा माल, फैक्ट्रियों पर लगने लगे ताले

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। कोरोना काल के बाद पांचवीं बार दवाओं का कच्चा माल 33 फीसदी तक महंगा हो गया है। सरकार ने कई दवाओं पर दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) लागू कर रखा है। इससे कंपनियां दवाओं की कीमतों में इजाफा नहीं कर पा रहीं हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई दवा फैक्टरियों पर ताले लगने लगे हैं।
विज्ञापन

भारत चीन से सीधे कच्चे माल नहीं मंगवा रहा है। दवाओं का रॉ मैटेरियल चीन से ही नेपाल, मलेशिया, वियतनाम से होते हुए भारत आ रहा है। इस वजह से भी कच्चे माल की कीमत ज्यादा अदा करनी पड़ रही है। वहीं, डॉलर की तुलना में लगातार रुपया कमजोर हो रहा है। ऐसे में कोरोना काल में पांचवीं बार दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में उछाल आ गया है। पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमतेें जहां 13.46 फीसदी बढ़ी हैं। वहीं, एंटीबायोटिक में सिप्रोफ्लोक्सासिन का रॉ मैटेरियल 7.69 फीसदी, ओफ्लोक्सासिन का 11.29 और एजिथ्रोमाइसिन 25.47 प्रतिशत महंगा हुआ है।
पेन किलर में डाइक्लोफेनिक सोडियम के कच्चे माल के दाम 17.27 फीसदी बढ़ गए हैं। मल्टी विटामिन में फोलिक एसिड के रॉ मैटेरियल की कीमत 33.33 प्रतिशत तक बढ़ गई है। दवा विक्रेताओं का कहना है- चूंकि, इनमें से अधिकांश दवाओं पर डीपीसीओ लागू है। ऐसे में इनके दाम कंपनियां नहीं बढ़ा पाएंगी। इसलिए उत्पादन घट जाएगा। इसलिए भविष्य में दवाओं का संकट हो सकता है।
विज्ञापन

क्या होता है डीपीसीओ
डीपीसीओ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सरकार द्वारा जारी एक आदेश है, जो इसे कुछ आवश्यक दवाओं और उनके फॉर्मूलेशन की कीमतों को तय करने में सक्षम बनाता है। डीपीसीओ द्वारा कवर की जाने वाली दवाओं की अधिकतम कीमतों को सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाता है।
ये आया अंतर
सॉल्ट का नाम अगस्त में अब
पैरासिटामोल 520 590
डाइक्लोफेनिक सोडियम 550 645
ओफ्लोक्सासिन 3100 3450
एजिथ्रोमाइसिन 2650 3325
सिप्रोफ्लोक्सासिन 2275 2450
फोलिक एसिड 3150 4200
(नोट: दाम प्रति किलो में।)
30 फीसदी उत्पादन यूनिट हो गईं बंद
कोरोना काल के बाद दवाओं का कच्चा माल पांचवीं बार महंगा हुआ है। दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के सर्वे में ये बात सामने आई है कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 30 फीसदी फैक्टरियों ने दवाओं की लागत न निकल पाने से उत्पादन बंद कर दिया है। ये फैक्टरियां बिकने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। अब फिर से कच्चा माल महंगा होने से भविष्य में दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। - नितिन मोदी, सचिव, झांसी केमिस्ट एसोसिएशन।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें