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बुंदेलखंड में बना 14850 करोड़ का एक्सप्रेस वे, हाथ नहीं आई एक भी पाई जीएसटी

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झांसी। चित्रकूट के गोंडा गांव से निकलकर लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे से जुड़ने वाले 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर 14,850 करोड़ रुपये खर्च हुए। इतनी मोटी रकम बुंदेलखंड में खर्च होने के बाद भी जीएसटी के नाम पर एक भी पाई बुंदेलखंड परिक्षेत्र के हाथ नहीं आई।
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वर्ष 2020 में बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का निर्माण शुरू होने पर विभिन्न बड़ी कंपनियों को इसका काम मिला। उम्मीद जताई जा रही थी कि यहां काम करने से बुंदेलखंड परिक्षेत्र को जीएसटी के तौर पर मोटा राजस्व भी हासिल होगा लेकिन, कुछ समय बाद ही जीएसटी नियमों के चलते अफसरों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। जीएसटी नियमों में साफ कर दिया गया कि कंपनियों का जहां पंजीकरण होगा वहीं उनको जीएसटी चुकाना होगा। इसके सामने आने से जीएसटी अफसरों को करारा झटका लग गया। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के निर्माण में लगी चार कंपनियां अलग-अलग शहरों में पंजीकृत थीं लेकिन, काम यहां कर रही थीं। इनमें दिलीप बिडकॅान (लखनऊ) ग्वार कंस्ट्रेक्शन (मौरांवा) अशोक बिडकॅान(फर्रुखाबाद ) एटको इंफ्राटेक (लखनऊ ) शामिल हैं। इनमें दिलीप बिडकॉन को 45.3 किमी, ग्वार को 101 किमी, अशोक बिडकॉन को 49 किमी, एटको इंफ्राटेक 50.5 किमी में निर्माण कराया लेकिन, जीएसटी निमयों के चलते इनसे बुंदेलखंड परिक्षेत्र को एक रुपये की भी जीएसटी नहीं मिली। अपर आयुक्त (ग्रेड वन) भानु प्रकाश मिश्र का कहना है कि इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन इस परिक्षेत्र में नहीं था।
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