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Jhansi News: सरकारी अस्पतालों से हर माह 600 मरीज इलाज पूरा होने से पहले चले जाते निजी अस्पताल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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झांसी। स्वास्थ्य सेवाओं में सुविधाओं का अभाव और निजी अस्पतालों में अच्छा इलाज मिलने की धारणा लिए मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने से कतरा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज हो या जिला अस्पताल या फिर रेलवे चिकित्सालय, यहां आने वाले मरीज एक दो दिन इलाज कराने के बाद निजी अस्पताल जाने के लिए रेफर करा रहे हैं या फिर छुट्टी करा कर चले जा रहे हैं। सरकारी डॉक्टरों का कहना है कि मरीज तुरंत लाभ की आशा में ऐसा करते हैं।
रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और रेलवे अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 150 मरीज भर्ती होते हैं। लेकिन, इनमें से लगभग 20 मरीज छुट्टी कराने या दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर देने की मांग करते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव है। मेडिकल कॉलेज को छोड़ दें तो अन्य दोनों अस्पतालों में गंभीर बीमारी के इलाज के लिए वह सुविधाएं अब भी उपलब्ध नहीं हैं, जो मरीजों को चाहिए। वहीं, मेडिकल कॉलेज में भी कई बार मशीनें खराब होने के चलते मरीजों को सरकारी अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी जांचों के लिए निजी सेंटर जाना पड़ता है।
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- जिला अस्पताल में नहीं हैं ये सुविधाएं
जिला अस्पताल में सिर की गंभीर चोट, कैंसर, बर्न, रेटिना का ऑपरेशन, एमआरआई और लकवा के इलाज की सुविधाएं नहीं हैं। जिसके चलते इन बीमारियों के 8 से 10 मरीज प्राथमिक उपचार के बाद प्रतिदिन मेडिकल कॉलेज या हायर सेंटर के लिए रेफर किए जा रहे हैं।

- रेलवे अस्पताल में नहीं हैं ये सुविधाएं
मंडलीय रेलवे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सीटी स्कैन, हेड इंजिरी, रेटिना का ऑपरेशन, लकवा रोग के इलाज के लिए सुविधाएं नहीं हैं। अच्छी बात यह कि रेलवे ने देश के लगभग हर बड़े निजी अस्पताल से अनुबंधन किया है। ऐसे में यहां से प्रतिदिन 7 से 8 मरीजों को निजी अस्पताल के लिए रेफर किया जा रहा है।

मेडिकल से पहले छुट्टी कराते हैं, फिर लौट कर आते हैं
मेडिकल कॉलेज में अधिकांश सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन, फिर भी मरीज यहां इलाज कराने से कतराते हैं। यहां इलाज कराने के दौरान ही लगभग 6 मरीज छुट्टी लेकर निजी अस्पतालों में चले जा रहे हैं। लेकिन, पैसा खत्म होने के बाद फिर से मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो रहे हैं।

वर्जन
यहां भर्ती होने वाले मरीज या उनके तीमारदार यह सोचकर आते हैं कि उन्होंने जो अनुमान लगाया है वह उसी अवधि में ठीक हो जाएंगे। लेकिन, गंभीर बीमारी होने के चलते समय लगता है। इसी बात से परेशान मरीज छुट्टी या रेफर कर देने की मांग करते हैं। हमारे यहां से लगभग 6 मरीज प्रतिदिन रेफर होते हैं या फिर वह खुद ही छुट्टी करा लेते हैं।
डॉ. सचिन माहुर, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज, झांसी।

वर्जन
जिला अस्पताल में कई गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा है। लेकिन, कुछ बीमारी और दुर्घटनाओं से संबंधित स्वास्थ्य सेवाएं यहां उपलब्ध नहीं हैं। जिसके चलते 8 से 10 मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
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डॉ. प्रमोद कुमार कटियार, मंडलीय प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, झांसी।

वर्जन
अस्पताल में कई स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध न होने के चलते हम 7 से 8 मरीजों को अनुबंधित अस्पताल के लिए रेफर करते हैं। कई बार मरीज भी बाहर भेजने की मांग करते हैं।
डॉ. राकेश निगम, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, रेलवे अस्पताल, झांसी।
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