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Jhansi News: हार्ट अटैक के मरीज को सीपीआर देने में की देरी तो हर मिनट मरीज के बचने की उम्मीद 17 फीसदी कम हो जाती

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झांसी। विकास भवन में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन के तहत अधिकारियों, कर्मचारियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का प्रशिक्षण दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट अटैक के बाद कई मरीजों की जान सीपीआर के जरिए बचाई जा सकती है। सीपीआर देने में देरी की तो हर मिनट मरीज के बचने की उम्मीद 17 फीसदी कम होती जाती है। एडवांस लाइफ सपोर्ट के राज्य समन्वयक और मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि आजकल लोगों की शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं। खासकर सरकारी विभागों में तो अधिकारियों और कर्मचारियों को कई-कई घंटे बैठकर ही काम करना पड़ता है। दूसरी तरफ, लोग ज्यादा तला-भुना, चिकना और मीठा खाने लगे हैं। इससे शरीर में फैट (वसा) ज्यादा जमा हो जाता है। ये वसा दिल की नसों में जमता जाता है। इससे नस सिकुड़ती जाती हैं और आगे चलकर नस में ब्लॉकेज होने से खून का संचार रुक जाता है। तब व्यक्ति को हार्ट अटैक आ जाता है। हार्ट अटैक पड़ने के बाद सीपीआर के जरिए कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ मिश्रा ने बताया कि सीपीआर के दौरान मरीज की छाती के बीचों-बीच ह्रदय की तरफ वाले हिस्से को हथेली से दबाते हैं। मगर सीपीआर के दौरान कई चीजों का ध्यान रखना भी जरूरी है। सीपीआर करते समय कोहनी बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए और कंधे से जोर लगना चाहिए। एक मिनट में सौ से 120 बार ह्रदय को दबाना पंप करना है। 30 बार हार्ट को पंप करने के बाद दो बार मुंह से रोगी को सांस देनी है। जब मरीज की आखिरी सांसें चल रही हैं, तब भी सीपीआर दे सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन दिनेश भार्गव ने किया। इस दौरान डीडीओ सुनील कुमार, डीपीआरओ जगदीश राम गौतम, हिमांशु सारस्वत, राजेंद्र पटेरिया, विश्वनाथ शर्मा, अमित दुबे, आशुतोष शर्मा, अक्षय तिवारी, विजय कुमार, दीप्ती निरंजन, कीर्ति श्रीवास्तव, संजय, वीरेंद्र कुमार, ओमप्रकाश चौरसिया, सुशील कुमार, विजय मानव, धर्मेंद्र वर्मा, सौरभ शर्मा, नितेश रायकवार, अजय कटियार, बीबी श्रीवास्तव मौजूद रहे।
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सीपीआर के बारे में जानें
- हार्ट अटैक रोगी को जमीन या ठोस सतह पर लिटाकर सीपीआर दें।
- धड़कन महसूस न होने पर ही सीपीआर देना है।
- ध्यान रखें कि सीपीआर के दौरान चार-पांच सेंटीमीटर तक छाती दबे।
- सोफे या दबने वाली सतह पर मरीज को सीपीआर न दें।
- गले की नब्ज चल रही है तो सीपीआर नहीं करना है।

इनको ह्रदयघात का खतरा रहता ज्यादा
- मधुमेह रोगी
- हाई बीपी का शिकार
- धूम्रपान करने वाले
- जरूरत से ज्यादा मोटे
- किडनी के मरीज
- जिन्हें स्ट्रोक पड़ चुका


ये बोले अधिकारी

सीपीआर का प्रशिक्षण सभी अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए जन उपयोगी रहा। अब तक सीपीआर के बारे में सुनते थे मगर प्रशिक्षण के दौरान सीपीआर देना भी सभी ने सीखा। इससे आपदा की स्थिति में जरूरत पड़ने पर लोग दूसरों की जान बचा सकते हैं। - सुनील कुमार, जिला विकास अधिकारी।

मैंने खुद सीपीआर के जरिए अपने साढ़ू की जान बचाई है। हर व्यक्ति को सीपीआर देना आना चाहिए। क्योंकि, हार्ट अटैक आने के बाद मरीज के पास बहुत कम समय होता है। अमर उजाला फाउंडेशन के तहत जन उपयोगी प्रशिक्षण का आयोजन कराना सराहनीय है। - जगदीश राम गौतम, डीपीआरओ।
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