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अंग्रेज सरकार भी नहीं लगा पाई थी जलविहार महोत्सव रोक

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मऊरानीपुर। संवत1699 में जब भगवान गूदर बाबा (रामराजा सरकार) और नंद किशोर नटवर लठाटोर महाराज की सवारी जल विहार हेतु निकली तो अंग्रेजों ने विरोध कर विमान को थाने ले गए। तब लाल बाबा के नेतृत्व में भगवान की शाही सवारी निकाली गई। सड़कों पर आस्था को देख न सिर्फ फिरंगी झुके बल्कि गूदर बादशाह, लठाटोर महाराज, बांके विहारी, धनुषधारी व अन्य आराध्य देवों का गजाशाही (चांदी के सिक्के) से तिलक किया गया। तभी से तिलक की परंपरा अब भी चली आ रही है।
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करीब 153 साल का इतिहास समेटे प्रांतीय मेला जलविहार महोत्सव 5 सितंबर से प्रारंभ होगा। जानकार बताते हैं कि मेले के दिन भगवान गूदर बादशाह सरकार की अगुवाई में कई आराध्य देवों के विमान निकाले जाते हैं, जिसका नेतृत्व स्वयं बादशाह (रामराजा) कई सालों से करते आ रहे हैं। ब्रिटिश शासनकाल में 1937 में मऊरानीपुर नगर पालिका बोर्ड का गठन हुआ था। जिसके प्रमाण नगर पालिका के पास आज भी उपलब्ध हैं। कोरोना काल के चलते साल 2020 व 2021 में मेला स्थगित किया गया था। इससे पहले सन 1914 में प्लैग की बीमारी फैली थी, तब विमानों पर रोक लगाई थी। पूरा नगर खाली हो गया था। तब लाल बाबा ने केवल गूदर बाबा का विमान विहार को निकाला था।
साहित्यकार गदाधर त्रिपाठी व बुंदेलखंड पीठाधीश्वर बाबा रामदास ब्रह्मचारी बताते हैं कि मऊरानीपुर को मठ-मंदिरों की नगरी कहा जाता है। भगवान लठाटोर की लीलाएं भी अनूठी हैं। जब भगवान को विमान में विहार के लिए बाहर लाने का प्रयास किया जाता है तो वह कुछ समय तक तो मंदिर से निकलते ही नहीं हैं, फिर उनसे विनती की जाती है। तब वह बाहर आते हैं बुजुर्ग भास्कर अग्रवाल बताते हैं कि पहले लठाटोर महाराज को बडे़-बड़े लठों पर विहार के लिए निकाला जाता था, लेकिन रास्ते में लट्ठ टूट जाते थे, फिर विगत कई सालों से उन्हें जीप-कार में दरबार सजाकर ले जाया जाता है। वहीं, गूदरबाबा को आज भी लठों पर सवार कर विहार कराया जाता है। साहित्यकार बताते हैं कि ओरछा नरेश राजा मधुकर शाह ने मऊरानीपुर बसाया और विकसित किया। किसी समय में यह टोला होता था। रानीपुर में उनकी रानी की गढ़ी थी। फिर मऊ और बगल के कस्बे रानीपुर को मिलाकर ‘मऊरानीपुर बनाई गई। उसी समय से विमानों की परंपरा भी शुरू हुई थी।
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इसी क्रम में 5 सितंबर को श्री गहोई वैश्य नवयुवक सेवा मण्डल समिति द्वारा 38वाँ अखिल भारतीय विराट सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलन संजय गोयल (आईएएस) मण्डलायुक्त झाँसी मण्डल के द्वारा किया जाएगा। इसमें मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक डॉ. रश्मि आर्य व विशिष्ट अतिथि डॉ. संदीप सरावगी, पालिका अध्यक्ष हरिश्चंद्र आर्य, पंचगहोई समाज सीताराम बिलैया, राष्ट्रीय अध्यक्ष आकाशवाणी दूरदर्शन कर्मचारी संघ अनिल गुप्ता, विधायक प्रतिनिधि दीपक कठिल, कोषाध्यक्ष राकेश रावत उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच गहोई समाज अवधेश नगरिया व अध्यक्ष देवस्थान समिति गोपालदास दमेले के द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम संयोजन में विशाल मोर अध्यक्ष, उत्कर्ष सरावगी महामंत्री, अमन पहारिया कोषाध्यक्ष, सोनू चऊदा वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष बासुदेव रखौल्या, रचित कनकने, नीलभ कृष्ण कठिल, यश खरया आय-व्यय निरीक्षक, संयुक्त मंत्री शिवम चऊदा व हार्दिक बिलैया सहित गहोई वैश्य नवयुवक सेवा मण्डल के सभी कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे।
फोटो नं0 03
वर्जन - हिन्दुस्तान की साझा संस्कृति का जमानतदार 153 वर्ष पुराना मऊरानीपुर का जलविहार मेला है, ऐसी मान्यता है कि वर्ष में एक बार भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान गणेश आदि विशेष विमान में बैठकर सुखनई नदी में स्नान और जलविहार कर क्षेत्र का भ्रमण करते हैं और बिना भेदभाव के आम जनता को दर्शन देकर कल्याण करते हैं। बुंदेलखंड में इस जलविहार मेले का विशेष महत्व है।
अखिलेश सेठ
फोटो नं0 04
वर्जन - मऊरानीपुर के ऐतिहासिक मेला जलविहार में प्रतिवर्ष विमानों की संख्या में कमी होने के कारण यह महसूस हो रहा था कि कहीं मेला का अस्तित्व खत्म न हो जाए। इसी प्रेरणा से वर्ष 1983 में विमान सम्मेलन का आयोजन श्री गहोई वैश्य नवयुवक मण्डल के सामाजिक सहयोग से किया जा रहा है।
राधा रमन कठिल
फोटो नं0 05
वर्जन - विमानों की संख्या जलविहार महोत्सव में बरकरार रहे, उसकी प्रेरणा लेते हुये गहोई समाज नवयुवक मण्डल द्वारा किसी भी समाज के मंदिरों को जगह एवं बिहार के लिये प्रोत्साहित कर रही है। (कृपाशंकर कटारे)
फोटो नं0 06
वर्जन - नगरपालिका मेला जलविहार की बैठक में श्री हीरालाल सूरौठिया, पं जगदीश प्रसाद मिश्रा के समक्ष विमान की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को गहोई समाज ने स्वीकार कर नवयुवक मण्डल समिति को कार्यभार सौंपा
। भगवान दास सेठ
फोटो नं0 07
वर्जन - गहोई समाज नवयुवक मण्डल द्वारा विमान सम्मेलन किया जा रहा है। विमान सम्मेलन को सभी का सहयोग मिलता रहा है व संरक्षक मण्डल का भी पूर्ण सहयोग रहा है। लक्ष्मी नारायण कटारे)
फोटो नं0 08
वर्जन - मैँ भी इस अखिल भारतीय विमान सम्मेलन में बढ़चढ़कर हिस्सेदारी कर रहा हूँ एवं विमान सम्मेलन की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहा हूँ। कैलाश नारायण बरसैंया
फोटो नं0 09
वर्जन - बुंदेलखंड की प्राचीन परंपरा के अनुसार मऊरानीपुर में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को प्रतिष्ठित देव प्रतिमाओं को विमान मे बिठाकर उन्हें बड़ी धूमधाम से घुमाया जाता है फिर सुबह प्रतिमाओं का विहार कराया जाता है एवं शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मऊरानीपुर का सबसे प्रतिष्ठित मंदिर श्री लठाटोर जी भगवान का विमान निकलता है, जो परंपरा आज भी चली आ रही है।
श्रीमती उषा लव कृष्ण कठिल
फोटो नं0 10
वर्जन - मऊरानीपुर जल विहार ऐतिहासिक महोत्सव है। हम सब नगर वासियों की मऊरानीपुर मिनी अयोध्या के नाम से प्रसिद्ध है। मऊरानीपुर के जल विहार महोत्सव को राष्ट्रीय महोत्सव का दर्जा दिलाने का प्रयास अवश्य करना चाहिए।
श्रीमती मंजू पहारिया
फोटो नं0 11
वर्जन। करीब 153 साल का इतिहास समेटे प्रांतीय मेला जलविहार महोत्सव 5 सितम्बर से अखिल भारतीय विमान सम्मेलन के रूप में प्रारम्भ होने जा रहा है। इस परंपरा को कायम रखने के लिए गहोई नवयुवक सेवा मंडल समिति के युवाओं ने विमान सम्मेलन का कार्यभार सम्भाला है जो सराहनीय है।
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गोपाल दास दमेले
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