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ईएसआईसी: 68 साल पहले खुली डिस्पेंसरी, अस्पताल नहीं बन पाई

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झांसी। 68 साल पहले खुली कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की डिस्पेंसरी अब तक अस्पताल में तब्दील नहीं हो पाई है। जबकि, इससे कर्मचारी और उनके परिवार को मिलाकर 50 हजार लोग जुड़े हैं। कोई भी मरीज यहां दिखाने के लिए आता है तो सिर्फ प्राथमिक उपचार हो पाता है। ज्यादा परेशानी होने पर उसे इलाज के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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इलाइट चौराहे के पास मनु विहार कॉलोनी में खुली ईएसआईसी डिस्पेंसरी में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 11 से ज्यादा जिलों के मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। मगर यहां सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। मरीज का प्राथमिक उपचार तो यहां पर हो जाता है मगर डॉक्टर को लगता है कि मरीज की जांच कराने की जरूरत है और फिर उसके बाद दवाएं दी जाएं तो तुरंत जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज आदि चिकित्सालयों में रोगी को रेफर कर दिया जाता है। क्योंकि, डिस्पेंसरी होने के चलते यहां पर सामान्य खून की जांचों तक की सुविधा नहीं है। कोई फ्रैक्चर का मरीज आता है तो प्लास्टर चढ़ने तक के लिए उसे रेफर करना पड़ता है।


यहां के मरीज इलाज कराने आते
ईएसआईसी में मंडल के झांसी, ललितपुर और जालौन के मरीजों के अलावा उत्तर प्रदेश के हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर समेत आसपास के जिलों के मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं।
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ये है नियम

पांच हजार ईएसआईसी कर्मचारियों के पंजीकरण पर डिस्पेंसरी और 20 हजार पर अस्पताल खुलने का प्रावधान है। इस हिसाब से झांसी में मानक से करीब तीन गुने लोग ईएसआईसी डिस्पेंसरी से पंजीकृत हैं।

ये है स्टाफ की स्थिति

पदनाम सृजित कार्यरत

डॉक्टर 3 2

फार्मासिस्ट 2 2

क्लर्क 2 1

एलटी 1 0

ड्रेसर 1 2

एएनएम 1 0

20 हजार लोगों के पंजीकरण पर ईएसआईसी अस्पताल खुलने का नियम है। लगातार पंजीकरण बढ़ रहे हैं। इसकी सूचना भी हर महीने सीएमओ के जरिए निदेशालय जाती है। जल्द ही अस्पताल खुलने की संभावना है। - डॉ. रचना पीपरी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, ईएसआईसी अस्पताल।
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