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इंजन हुए स्मार्ट, रेड सिग्नल देखते ही थम जाएंगे पहिए

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झांसी। लोको पायलट के सिग्नल तोड़ने जैसी घटनाएं रोकने को रेल महकमा आटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम तकनीक इस्तेमाल में लाने जा रहा है। इस तकनीक में इंजन भी स्मार्ट होंगे। तकनीक के जरिए रेल पटरी और इंजन के बीच एक लूप तैयार होगा। इसकी मदद से लाल सिग्नल के दायरे में जैसे ही रफ्तार के साथ ट्रेन पहुंचेगी, इंजन में लगा उपकरण सक्रिय हो उठेगा और गाड़ी में खुद ब खुद ब्रेक लगना आरंभ हो जाएगा। रेल अफसरों के मुताबिक ताज एक्सप्रेस, वलसाड-हरिद्वार, महाकौशल एक्सप्रेस समेत अन्य गाड़ियों में इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है।
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रेलवे ट्रेन प्रोटेक्शन एंड बर्निंग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस) को अलग- अलग मंडलों में लगाने का काम कर रहा है। इसमें पटरियों के बीच लोहे की पट्टियों की एक जाली लगाई जाती है। यह जीपीएस सॉफ्टवेयर की तरह काम करती है। कोई भी ट्रेन जो सिग्नल पास करने की कोशिश करेगी, उसके आपातकालीन ब्रेक तुरंत सक्रिय हो जाएंगे। यदि ट्रेन की रफ्तार काफी तेज है तो सिग्नल के पास एक दूसरा ट्रांसमीटर लगाया जाता है, जिससे तेजी से गुजरने वाली ट्रेनों को भी आसानी से नियंत्रित किया जा सकेगा।सर्किट से ट्रेन गुजरने पर इंजन के भीतर लगे मॉनीटर से उसका संपर्क हो जाता है। अगर आगे लाल सिग्नल है तो इस सिस्टम की मदद से अपने आप ब्रेक लगना शुरू हो जाएंगे। लाल सिग्नल के पहले ही ट्रेन रुक जाएगी। इमरजेंसी ब्रेक अपने आप काम करने लगते हैं। रेल अफसरों के मुताबिक उस समय अगर ट्रेन की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा भी होगी, तब भी इस गति की ट्रेन को इस तकनीकी के माध्यम से आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया है कई ट्रेनों के इंजनों को इसके अनुकूल बनाया गया है। इससे यात्रा को सुरक्षित बनाने में काफी मददगार साबित हो रहा है।
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