झांसी। बुंदेलखंड में तो आतंक का दूसरा नाम रहा है लेखराज सिंह यादव। हमेशा गाड़ियों के काफिले के साथ चलने वाला इस शख्स ने अपने मजबूत सियासी ताल्लुकात भी बना लिए थे। जरायम की दुनिया से जुड़े छोटे मोटे अपराधियों को जोड़कर एक बड़ा नेटवर्क स्थापित किया था लेखराज ने। उसे लेकर एक बात अभी भी चर्चा में रहती है कि वह क्राइम यूपी में करता था और पनाह मध्यप्रदेश में लेता था।
रानीपुर कस्बा निवासी लेखराज का नाम बुंदेलखंड के कई बड़े नेताओं के साथ जुड़ा रहा। बताया जाता है कि यह नेता भी वक्त आने पर उसकी मदद किया करते थे। जमीनों पर कब्जे, खनन के काले कारोबार से लेकर कई धंधों में वह शामिल रहा। एक वक्त तो हालात ऐसे बन गए थे कि पुलिस भी उस पर हाथ डालने से बचती थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए थाने से दबिश निकलती थी और उस तक सूचना पहुंच जाती थी। लेखराज ने तत्कालीन भाजयुमो जिलाध्यक्ष मनोज श्रोत्रिय, दीपचंद्र, विमल, मोनी पाल को
17 दिसंबर 2006 को गोलियों से भून डाला था। वारदात के बाद लेखराज मध्य प्रदेश भाग गया। हत्याकांड ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। इस मामले में वर्ष 2019 में दस्यु उन्मूलन विशेष कोर्ट ने लेखराज समेत उसके आठ गुर्गों को उम्र कैद की सजा सुना दी। इसके बाद से लेखराज जेल के सीखचों के पीछे है।
अलग-अलग थानों में दर्ज हैं 60 से अधिक मुकदमे
हिस्ट्रीशीटर लेखराज सिंह का लंबा-चौड़ा आपराधिक रिकॉर्ड है। उसके खिलाफ झांसी समेत आसपास के जनपद एवं मध्य प्रदेश के कई थानों मेें करीब साठ मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड में वह माफिया के तौर पर दर्ज है। जिसका लीडर वह खुद है। उसके साथी के तौर पर पुत्र जय हिंद यादव, रामस्वरूप, महेंद्र समत नौ अन्य सदस्य हैं। उसके पुत्र जय हिंद पर 21 मुकदमे एवं साथी रामस्वरूप के खिलाफ 22 एवं महेंद्र सिंह के खिलाफ सात मुकदमे हैं।
मुठभेड़ की वायरल ऑडियो क्लिप ने मचा दिया था हंगामा
हिस्ट्रीशीटर लेखराज यादव एवं तत्कालीन मऊरानीपुर कोतवाल सुनील सिंह के बीच मुठभेड़ को लेकर लीक हुई एक ऑडियो क्लिप ने पूरे प्रदेश में हंगामा मचा दिया था। ऑडियो क्लिप लीक होने के बाद कोतवाल सुनील सिंह को अपनी नौकरी तक से हाथ धोना पड़ा। करीब आठ मिनट लंबी इस बातचीत में लेखराज एवं कोतवाल के बीच पुलिस मुठभेड़ को लेकर बातचीत की जा रही थी। लेखराज खराब इतिहास की बात कहते हुए अच्छे भविष्य की बात कोतवाल से कह रहा था जबकि कोतवाल उसे मुठभेड़ से बचने के तरीके बता रहा था। दोनों की बातचीत उजागर होने के बाद प्रदेश सरकार पुलिस मुठभेड़ को लेकर सवालों में घिर गई थी। इस ऑडियो क्लिप के लीक होने से कुछ दिन पहले ही लेखराज की पुलिस से मुठभेड़ हुई थी लेकिन, लेखराज अपने पुत्र के साथ भागने में कामयाब रहा था।