झांसी। सूखी धरती पर इस बार अमृत वर्षा हुई तो झांसी का भूजल स्तर काफी सुधर गया है। पिछले दो सालों के आंकड़े देखें तो पोस्ट मानसून बारिश के बाद इसमें 1.73 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। अब झांसी का भूजल स्तर 5.06 मीटर पहुंच गया है।
वर्ष 2019 में पोस्ट मानसून बारिश के बाद जिले का भूजल स्तर 4.83 मीटर था। वर्ष 2020 में कम बारिश होने से ये खिसककर 6.79 मीटर पहुंच गया था। 2022 में बारिश ने कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। ऐसे में पोस्ट मानसून बारिश के बाद भूजल स्तर बढ़कर 5.06 मीटर पर पहुंच गया है। भूजल विभाग के सीनियर जियोफिजिस्ट शशांक शेखर सिंह ने बताया कि जल स्तर बढ़ाने के लिए बबीना और मऊरानीपुर में अटल भूजल योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत लोगों को जागरूक करके भूजल प्रबंधन की कमान जनता के हाथ में ही सौंप दी गई। दोनों ब्लॉकों की 31 ग्राम पंचायतों को भूजल बढ़ाने के लिए चयनित किया गया है। इसके अलावा स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई के लिए प्रोत्साहित करते हुए उपकरणों पर सब्सिडी दी गई। जनपद में भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद गठित हुई और होटल, औद्योगिक इकाइयों से लगे सबमर्सिबल से पानी के दोहन और रिचार्ज के इंतजामों की निगरानी शुरू की गई। सरकारी, अर्द्ध सरकारी भवनों में बारिश के पानी के संचयन के प्लांट लगे। अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब बनाए गए। इन कारणों से झांसी का भूजल स्तर तेजी से सुधरा है।
भूजल मांपने को लगे हैं 121 हाइड्रोग्राफ स्टेशन
जनपद में 121 हाइड्रोग्राफ स्टेशन हैं। यहां पर भूगर्भ जल की जांच के लिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगी होती है। इसको भूगर्भ में डालते हैं तो पानी तक पहुंचते ही आवाज आ जाती है।
बामौर, गुरसराय की स्थिति अभी भी ठीक नहीं
जिले में जलस्तर में भले ही सुधार हुआ हो लेकिन बामौर और गुरसराय की स्थिति अभी भी ठीक नहीं है। बामौर में भू जल स्तर जहां 10.45 मीटर है, तो गुरसराय में ये 7.62 मीटर है। सबसे बेहतर स्थित मोंठ की है, जहां का जलस्तर 1.14 मीटर है।
पोस्ट मानसून भूजल स्तर में ये आया अंतर
ब्लॉक वर्ष 2020 वर्ष 2022
बड़ागांव 4.73 मीटर 2.15 मीटर
बबीना 4.62 मीटर 3.36 मीटर
बामौर 12.09 मीटर 10.45 मीटर
बंगरा 6.0 मीटर 5.47 मीटर
चिरगांव 6.47 मीटर 3.9 मीटर
गुरसराय 9.89 मीटर 7.62 मीटर
मऊरानीपुर 7.59 मीटर 6.42 मीटर
मोंठ 2.95 मीटर 1.14 मीटर