अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कान खुजलाने के लिए लोग जाने क्या क्या इस्तेमाल कर रहे हैं। माचिस की तीली, झाड़ू की सींक और सेफ्टी पिन। इनसे कान के पर्दे तक फट जा रहे हैं। हर माह करीब 15 लोग इलाज के लिए डाक्टर के पास पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। दो महीने में ठीक न होने पर डॉक्टरों द्वारा सर्जरी की जाती है।
कान के पर्दे को ईयरड्रम कहते हैं, जो ध्वनियों के कंपन को प्राप्त करके ध्वनि सुनने में मदद करता है। डॉक्टरों ने बताया कि पर्दा फटने का मतलब कान के पर्दे में छेद होना है। इससे सुनने की क्रिया बाधित हो सकती है। कान में खुजली होने पर लोग सींक या पिन आदि से सफाई करने लगते हैं। सफाई के दौरान कान के पर्दे में इसके लग जाने से वो फट जाता है। मेडिकल कॉलेज के नाक, कान और गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार कश्यप ने बताया कि सींक, पिन आदि के लगने से कान का पर्दा फटने के हर महीने 10 से 12 मामले आते हैं। कई बार लोग बच्चों के कान की सफाई के दौरान भी पिन, माचिस की तीली आदि का इस्तेमाल करते हैं। वहीं वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जेपी पुरोहित ने बताया कि उनके पास भी कान का पर्दा फटने के हर महीने चार-पांच केस आते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
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- इयर बड से सावधानी से कान साफ करें।
- कान में पिन, चाबी, सींक आदि नहीं डालें।
- भीड़भाड़ में कान की सफाई न करें।