झांसी। छह माह बीत जाने के बाद भी जिला अस्पताल में लकवा के इंजेक्शन नहीं है। इंजेक्शन लगाने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण अस्पताल प्रबंधन की ओर से डिमांड ही नहीं भेजी गई है। जिसका खामियाजा गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
लकवा का अटैक होने के चार घंटे के भीतर लकवा का इंजेक्शन लगना आवश्यक होता है। समय से इंजेक्शन नहीं लगने की दशा में मरीज लकवा का पीड़ित हो सकता है। बाजार में इंजेक्शन की कीमत चालीस हजार रुपये से अधिक होती है। लेकिन छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अस्पताल में लकवा के इंजेक्शन नहीं हैं। वहीं इंजेक्शन लगाने के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण अस्पताल प्रबंधन की ओर से इंजेक्शनों की मांग ही नहीं की गई है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. डीएम कटियार ने बताया कि पूर्व में तैनात चिकित्सक डॉ. डीएस गुप्ता ने थ्रंबोलाइसिस की ट्रेनिंग प्राप्त की थी। वह ही लकवा के इंजेक्शन लगाते थे। अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। थ्रंबोलाइसिस की ट्रेनिंग के लिए शासन को लिखा गया है। ट्रेनिंग के बाद ही इंजेक्शनों का मंगाया जाएगा।