झांसी। पहले जहां दलालों के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से बन जाते थे। लेकिन अब ड्राइवर ड्राइविंग टेस्ट के दौरान नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण फेल हो जाते हैं। जिससे प्रतिदिन टेस्ट देने आने वाले 100 आवेदकों में से 80 फेल हो रहे हैं, जिससे लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या 20 से 25 तक रह गई है।
सड़क पर वाहन दौड़ाने से पहले जरूरी है कि उसको चलाने के साथ ही यातायात के नियमों की जानकारी हो, जिससे दुर्घटना का ग्राफ कम किया जा सके। वाहन तब तक सड़क पर नहीं चलाया जा सकता है, जब तक आरटीओ विभाग से ड्राइविंग लाइसेंस जारी न हो जाए। पहले विभाग के पास वाहन चलाने का टेस्ट लेने के लिए ट्रैक तो था, लेकिन बिना वाहन चलाए ही दलालों को पैसे देकर लाइसेंस बन जाते थे। लेकिन अब आईटीआई के पीछे आरटीओ विभाग का ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बन गया है, जहां लाइसेंस बनने से पहले आवेदकों से यातायात के नियमों की परीक्षा के साथ वाहन चलाने का टेस्ट लिया जाता है। जिसमें ज्यादातर ड्राइवर टेस्ट में फेल हो जाते हैं। ऐसे में यह ऑनलाइन लर्निंग लाइसेंस तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन वाहन चलाने का प्रशिक्षण नहीं लेते हैं, जिससे स्थायी लाइसेंस के लिए होने वाले टेस्ट में फेल हो जाते हैं। इसका नतीजा यह है कि पहले विभाग में लाइसेंस बनवाने वाले प्रतिदिन 70 से 80 आवेदक आते थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर 20 से 25 रह गई है।
ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आवेदकों से यातायात के नियमों की जानकारी के साथ वाहन चलाने का भी टेस्ट लिया जाता है। इस टेस्ट में पास होने वाले आवेदकों का ही लाइसेंस जारी किया जाता है। इसमें ज्यादातर आवेदक फेल हो जाते हैं। जिससे आवेदनों की संख्या कम हो गई है। - चरन सिंह, रीजनल इंस्पेक्टर आरटीओ