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गंदे पानी में बह गए नाले की सफाई के एक करोड़

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बरसात में महानगर को जलभराव से मुक्ति दिलाने के लिए बनाई गई योजना फेल हो गई है। नाले की सफाई को लेकर नगर निगम ने एक करोड़ रुपये खर्च किए। लेकिन हकीकत यह है कि कई नाले अब तक गंदगी से भरे पड़े हैं। आलम यह है कि नालों पर किया गया अतिक्रमण भी ध्वस्त नहीं किया गया। ऐसे में नाले पूरी तरह से साफ नहीं हो सके हैं। नगर निगम ने नालों की सफाई के लिए एक करोड़ रुपये का बजट तय किया था। 55 बड़े नालों की सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। नालों की सफाई का काम 15 जून तक पूरा किया जाना था। लेकिन अब तक नाले साफ नहीं हो सके हैं। महानगर का नटवली नाला भी गंदगी से भरा पड़ा है। पंचकुइंया मंदिर के पास बने नाले में गंदगी का अंबार लगा है। जबकि सुभाषगंज का नाला भी साफ नहीं हो सका। उधर, नगर निगम के अधिकारी नालों की सफाई का काम 80 फीसद पूरा होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन नालों की सफाई महज कागजों पर ही हुई है। ऐसे में एक बार फिर महानगर को जलभराव से जूझना पड़ेगा। महानगर में कई नालों पर अतिक्रमण कर मकान और दुकान बना लिए गए हैं। इनको ध्वस्त करने की भी कोई कवायद नहीं हुई। निगम के अधिकारी भी अतिक्रमण को नाला सफाई में बड़ी बाधा मान रहे हैं। नाले चोक होने से दिक्कत बढ़ रही है। नाला सफाई की मशीनें भी खराब पड़ी हैं। मुख्य अभियंता एलएन सिंह का कहना है कि नालों की सफाई का काम चल रहा है। कुछ जगहों पर अतिक्रमण से दिक्कत हो रही है। नालों को पूरी तरह से साफ कराया जा रहा है। महानगर के नालों की साफ करने के लिए 15 जून तक का समय तय किया गया था। लेकिन पांच नालों की सफाई की टेंडर प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। इन नालों की सफाई के लिए दो बार पुन: निविदा डाली जा चुकी है, लेकिन ठेकेदार आवेदन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में पांच बड़े नालों की सफाई अटकी हुई है।
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