अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर मंगलवार को उन्हें याद करते हुए झांसी में श्रद्धा के दीप जलाए जाएंगे। इस अवसर पर अमर उजाला और महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी की ओर से दीपांजलि होगी। इसमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता रहेगी।
स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम दीपशिखा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई स्वराज्य की खातिर अंग्रेजों से युद्ध करते हुए 18 जून 1858 को ग्वालियर में वीरगति को प्राप्त हो गईं थीं। अपने पीछे वह नारी शक्ति की अद्भुत मिसाल छोड़ गईं थीं, इसके चलते आज भी पूरी दुनिया में उनका नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। मंगलवार को उनका बलिदान दिवस है। इस अवसर पर अमर उजाला की ओर से रानी के विवाह स्थल प्राचीन गणेश मंदिर में शाम सात बजे दीपांजलि का आयोजन किया जाएगा। इसमें झांसी के लोग अपनी रानी की याद में दीपक और मोमबत्तियां जलाएंगे।
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रानी का बलिदान दिवस झांसी के इतिहास की महत्वपूर्ण तारीखों में से एक है। मंगलवार को उनके बलिदान दिवस पर गणेश मंदिर में दीपांजलि होगी। इसमें कोई भी व्यक्ति दीप जलाकर रानी के प्रति अपनी आस्था प्रकट कर सकता है।
- गजानन खानवलकर, सचिव, महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी
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गणेश मंदिर में ही काशी की कन्या मनु को नया नाम लक्ष्मीबाई मिला था और यह नाम कालांतर में नारी शक्ति का प्रतीक बनकर उभरा था। बलिदान दिवस पर उनके विवाह स्थल गणेश मंदिर में उनकी याद में दीप जलाए जाएंगे।
- राघव इंदापुरकर, सचिव, महाराष्ट्र समिति
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रानी के बलिदान दिवस पर होने वाली दीपांजलि में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। रानी का कृतित्व सभी के लिए प्रेरणादायक है। ऐसे आयोजनों के जरिये भावी पीढ़ी को उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने का मौका मिलता है।
- मुकेश सोनी, पार्षद
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देश की आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ संग्राम का बिगुल रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी की धरती से फूंका था। मंगलवार को बलिदान दिवस पर रानी की याद में गणेश मंदिर में दीपांजलि होगी। इसके अलावा घर-घर में भी दीप जलाए जाएंगे।
- अरविंद झा, पार्षद
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अपने घर में जलाएं आस्था के दो दीप
देश और दुनिया में झांसी की पहली पहचान रानी ही हैं। झांसी का नाम आते ही बरबस ही लोगों की जुबां पर रानी का नाम आ जाता है। वीरांगना के बलिदान दिवस पर झांसी वाले भी अपने घर और प्रतिष्ठानों में रानी की याद में आस्था के दो-दो दीप जलाकर उनके प्रति श्रद्धा प्रकट कर सकते हैं। यह भावी पीढ़ी के लिए भी प्रेरणास्पद रहेगा।