अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण के दावे और वादे तो खूब किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे इतर है। इसका अंदाजा पहूज नदी (पुराना नाम पुष्पावती) की दशा को देखकर लगाया जा सकता है, जिसमें चार नालों का गंदा पानी लगातार गिर रहा है। इससे नदी का पानी बुरी तरह दूषित हो गया है। कई स्थानों पर तो नदी की जल धारा नाले के रूप में नजर आती है।
पहूज नदी बुंदेलखंड की पांच प्राचीन नदियों में से एक है। महाकवि अवधेश ने अपनी कविता में लिखा है ‘केन, धसान, पहूज, बेतवा पीते हैं चंबल का जल, आठ पहर पहरे पर ठाणों शीश झुकाए विध्यांचल...। लेकिन, पहूज नदी के प्रति सम्मान का यह भाव कविता तक ही सिमट कर रह गया है। लोग नदी में कचरा डालने से बिलकुल संकोच नहीं करते। फेंकी गई पूजन सामग्री से पहूज पटी नजर आती है। चार नालों का गंदा पानी भी चौबीसों घंटे नदी में गिरता रहता है। सबसे बड़ा नाला आल्हा घाट के पास है, जो सीपरी, आवास विकास, नंदनपुरा आदि क्षेत्रों से समेटकर लाए हुए गंदे पानी को नदी में समाहित कर देता है। जिस स्थान पर यह नाला गिरता है, उससे आगे नदी का पानी काला नजर आता है। यह स्थिति तब है जब तकरीबन दस साल पहले तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने इस नदी को गोद लिया था और तब इसके पुनरोद्धार के बड़े-बड़े दावे किए गए थे।
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आल्हा घाट के पास पहूज नदी में एक बड़े नाले का गंदा पानी चौबीसों घंटे गिरता रहता है। यह नाला नदी को बुरी तरह प्रदूषित कर रहा है। नाले की वजह से नदी के पानी का रंग काला हो गया है। यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। - विनोद अवस्थी, महामंत्री-दुर्गा उत्सव समिति
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पहूज बुंदेलखंड की प्राचीन नदियों में से एक है। उमा भारती ने इसे गोद लेकर इसके पुनरोद्धार का वादा किया था। लेकिन, इसके बाद पलटकर ध्यान नहीं दिया। चर्म रोग ठीक करने वाली यह नदी अब खुद बीमार हो गई है। इसका पानी अब आचमन लायक भी नहीं बचा है। - भानु सहाय, अध्यक्ष-बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा
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बुंदेलखंड में पानी की हर बूंद अमृत के समान है। बावजूद, प्राचीन पहूज नदी को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। यदि इस नदी का पुनरोद्धार करा दिया जाए तो यह बुंदेलखंड के बड़े इलाके का जल संकट दूर करने की क्षमता रखती है। - कृष्णकांत अग्रवाल, पंचवटी
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पहूज नदी जैसे प्राचीन जल स्रोतों का यदि सही ढंग से संरक्षण कर लिया जाए तो शासन-प्रशासन को पानी की उपलब्धता के लिए नए इंतजाम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन, इस दिशा में किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। - निर्देश द्विवेदी, अधिवक्ता