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अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड के लिए मिल रही तारीख पर तारीख

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झांसी। सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की जांच कराने के लिए मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहती हैं। घंटों इंतजार के बाद जांच का नंबर आ पाता है। रोजाना करीब सौ मरीजों को बिना जांच कराए या तो लौटना पड़ता है या उन्हें आगे की किसी तारीख का नंबर दे दिया जाता है। स्थिति यह है कि जिले की किसी भी सीएचसी में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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झांसी में मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की जांच की सुविधा उपलब्ध है। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए सबसे ज्यादा भीड़ मेडिकल कॉलेज में रहती है। यहां पर रोजाना सौ मरीजों के अल्ट्रासाउंड होते हैं। बताया गया कि 60 से अधिक मरीजों को रोजाना मेडिकल कॉलेज से आगे की तिथि का नंबर मिलता है, क्योंकि यहां सीएचसी, पीएचसी समेत बुंदेलखंड के कई जिलों के मरीज आते हैं। कई मरीजों का एक-एक हफ्ते में नंबर आ पाता है। वहीं, जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में 70 से 80 अल्ट्रासाउंड रोजाना हो जाते हैं। इन दोनों अस्पतालों को मिलाकर 35 से 40 मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आगे तारीख लेनी पड़ती है। वहीं कइयों को लौटना पड़ता है।
उधर, महिला अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर ट्रेनिंग करने के बाद जांच कर रहे हैं। जनपद में आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, इनमें चार फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) हैं। जहां पर सिजेरियन प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। इसके बावजूद कहीं पर भी अल्ट्रासाउंड नहीं होता है। सिर्फ मऊरानीपुर सीएचसी का निजी केंद्र से अनुबंध होने की वजह से गर्भवतियों की निशुल्क जांच होती है।
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ये भी जानें
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- मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट के सात पद के सापेक्ष तीन कार्यरत हैं।
- जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद सृजित हैं। एक ही तैनात।
बोले-मेडिकल कॉलेज में जांच कराने आए मरीज
छह दिनों बाद जांच के लिए नंबर आ पाया है। वो भी दोपहर एक बजे जांच हो पाई। दो बजे के बाद तक रिपोर्ट मिली है। ऐसे में ओपीडी का समय खत्म होने पर डॉक्टर उठ गए हैं। - अंगद सिंह, गुरसराय।
पेट में दर्द होने पर अल्ट्रासाउंड कराने आया हूं। एक सप्ताह बाद नंबर आया है। एक परिजन के साथ आया हूं। ऐसे में आने-जाने में ही दोनों को मिलाकर 400 रुपये किराया खर्च हो गया। - शोभाराम, निवाड़ी।
ओपीडी में दिखाने के दो दिन बाद पत्नी सलमा को अल्ट्रासाउंड की तारीख मिल पाई है। सुबह आठ बजे आने के बाद दोपहर डेढ़ बजे जांच हो पाई है। काफी इंतजार करना पड़ा। - याकूब खान, शिवाजी नगर।
मोंठ, मऊरानीपुर, बबीना, गुरसराय सीएचसी एफआरयू हैं। मऊरानीपुर में निजी केंद्र से अनुबंध होने से गर्भवतियों का निशुल्क अल्ट्रासाउंड होता है। बाकियों को सरकारी एंबुलेंस से जांच के लिए महिला अस्पताल लाते हैं। दो महीने पहले ही चार्ज संभाला है। इन चारों सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की जांच शुरू कराने का प्रयास जारी है। - डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ।
सीएचसी, पीएचसी समेत बुंदेलखंड से मरीज अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कॉलेज आते हैं। गर्भवतियों और इमरजेंसी वाले मरीजों की तत्काल जांच की जाती है। चूंकि, रेडियोलॉजी विभाग में पीजी कोर्स भी संचालित है। ऐसे में छात्रों को साथ में ट्रेनिंग भी दी जाती है। इसमें एक केस में पांच से दस मिनट का समय लगता है। - डॉ. अंशुल जैन, उप प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
अस्पताल में तैनात एमबीबीएस डॉक्टर ने रेडियोलॉजी जांच करने की ट्रेनिंग ली हुई है। कई सालों से वो ही जांच कर रहे हैं। अस्पताल की मशीन भी ठीक है। रोजाना करीब 70-80 मरीजों की जांच हो जाती है। - डॉ. सुमन, सीएमएस, महिला अस्पताल।
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