झांसी के गरौठा थाने में तैनात दरोगा बृजेश कुमार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। उसे थाने के बाहर चाय की दुकान के पास से घूस की रकम लेते हुए पकड़ा गया। लिखा-पढ़ी के बाद आरोपी दरोगा को जेल भेज दिया गया।
एंटी करप्शन टीम प्रभारी अंबरीश यादव के मुताबिक वर्ष 2012 में रमौरा निवासी छोटेलाल निषाद ने मोती कटरा के ग्राम प्रधान पर मनरेगा के काम में एक करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया था। छोटेलाल ने ग्राम प्रधान एवं सचिव के खिलाफ गरौठा थाने में धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज करा दिया। पिछले साल गरौठा पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इसके खिलाफ छोटेलाल ने कोर्ट में अपील दाखिल की। कोर्ट ने फिर से विवेचना कराने का आदेश दे दिया।
यह जांच दरोगा बृजेश यादव को सौंपी गई। छोटेलाल के मुताबिक दरोगा बृजेश चार्जशीट लगाने एवं आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीस हजार रुपये मांग रहा था। छोटेलाल ने यह रकम अधिक बताई। हालांकि बाद में बृजेश पांच हजार रुपये में चार्जशीट दाखिल करने पर राजी हो गया। छोटे लाल ने दरोगा के घूस मांगने की बात एंटी करप्शन टीम को बता दी। इस पर टीम प्रभारी अंबरीश यादव की अगुवाई में दरोगा को पकड़ने के लिए छह सदस्यीय टीम गठित हुई।
मंगलवार सुबह टीम ने नोटों में रंग लगाकर उसे छोटे लाल के हवाले कर दिया। ट्रैप टीम भी गरौठा थाने के पास पहुंच गई। यहां छोटेलाल ने बृजेश को चाय की दुकान के पास बुलाया। जैसे ही उसने नोट बृजेश को थमाया, एंटी करप्शन टीम ने दरोगा को धर दबोचा। दरोगा का हाथ धुलवाने पर उसके हाथ से नोट में लगा रंग छूटा। दरोगा के पकड़े जाने से गरौठा थाने में हड़कंप मच गया। बृजेश को गिरफ्तार करके एंटी करप्शन टीम नवाबाद थाने लेकर आई। ट्रैप टीम प्रभारी अंबरीश यादव के मुताबिक यहां लिखा-पढ़ी के बाद आरोपी दरोगा को जेल भेज दिया गया है।