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Jhansi News: बुंदेलखंड से एक साल में 40 करोड़ से अधिक ठग ले गए साइबर क्रिमिनल

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झांसी। बुंदेलखंड में डकैती, लूट और चोरी की घटनाओं से आठ गुना अधिक साइबर क्राइम हो रहा है। साइबर ठग नित नये तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अगर बुंदेलखंड के सातों जिलों में हुईं ठगी की घटनाओं में गई रकम को जोड़ेंगे तो पता चलेगा कि एक साल के भीतर 40 करोड़ की रकम साइबर ठग हड़प चुके हैं।
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पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बुंदेलखंड में पिछले एक साल के दौरान चोरी, लूट और डकैती के जहां 213 मामले दर्ज हुए। वहीं साइबर ठगी के 1706 मामले पंजीकृत हुए। इन सभी मामलों में साइबर ठगों ने एक साल के भीतर करीब 40 करोड़ की चपत लगाई है। अब इस रकम की रिकवरी कर पाना भी पुलिस के लिए बेहद मुश्किल है।
टच स्क्रीन मोबाइल फोन के बढ़ते चलन ने साइबर अपराधों में बाढ़ ला दी। बुंदेलखंड में झांसी, ललितपुर, उरई, बांदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट में रोजाना 15-20 लोग साइबर अपराधियों का शिकार हो रहे हैं। झारखंड के जामताड़ा, नालंदा समेत हरियाणा एवं पंजाब में बैठे शातिर बदमाश नए- नए झांसे देकर लोगों के बैंक एकाउंट खाली कर कर रहे हैं। ठगी का पता चलने पर भुक्तभोगी जब पुलिस के पास पहुंचता है तब पुलिस भी उसकी बहुत मदद नहीं कर पाती है।
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एक साल में जनपद वार साइबर ठगी के मामले
झांसी- 314
ललितपुर- 287
उरई- 214
बांदा- 299
महोबा- 197
हमीरपुर 153
चित्रकूट- 242
साइबर ठगों से नहीं हो पाती रकम की रिकवरी
अभी तक समय पर ठगी का पता चलने पर पुलिस बदमाशों का खाता सीजकर रकम की रिकवरी कर लेती थी लेकिन, अब साइबर बदमाश बेहद शातिर हो गए हैं। जालसाजी करके निकाले गए पैसे वह दस मिनट के भीतर एटीएम के जरिए बाहर निकाल लेते हैं। इस वजह से अब पुलिस रकम की रिकवरी भी नहीं कर पाती है। बहुत कोशिश के बाद जब रिकवरी होती है तब पुलिस को खाते में महज 20-30 रुपये ही मिलते हैं।
इन हथकंडों से होती है सबसे अधिक ठगी
- क्रेडिट कॉर्ड का झांसा देकर
- आसानी से लोन दिलाने के नाम पर
- केवाईसी कराने के नाम पर
- ओएलएक्स पर बेहद कम दाम में समान बेचने का लालच देकर
- नौकरी का झांसा देकर
- लकी विनर अथवा कौन बनेगा करोड़पति में एंट्री देने के नाम पर
- फेसबुक अथवा व्हाट्सएप पर दोस्ती गांठकर
- गूगल पर ऑन लाइन कस्टमर केयर का नंबर सर्च करने पर
1930 नंबर पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं
टच स्क्रीन फोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों को फोन इस्तेमाल करते समय सतर्कता बरतनी होगी। इससे साइबर ठगी से बच सकते हैं। ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल करते समय अपना पासवर्ड कभी शेयर न करें। मोबाइल में एप डाउनलोड करते समय भी सावधानी बरती जाए। कई एप मोबाइल फोन की संवेदनशील सूचनाओं का एक्सेस मांगते हैं लेकिन, इसको देने से पहले काफी सावधानी बरतनी चाहिए। ठगी का शिकार होने पर सबसे पहले पुलिस को सूचना देनी चाहिए। साइबर ठगी होने पर ऑनलाइन शिकायत के साथ ही 1930 नंबर पर कॉल करके भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
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-धर्मराज सिंह यादव, सीओ साइबर थाना
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