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डीजल में कटौती हुई, तो खड़ी हो गईं अधिकारियों की गाड़ियां

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नगर निगम में मंगलवार को अधिकारियों की गाड़ियों के ड्राइवरों ने हड़ताल कर दी। डीजल में कटौती होने के चलते ड्राइवरों ने वाहन चलाने से हाथ खड़े कर दिए। इसके चलते अफसर अपने निजी वाहनों से और पैदल चलकर दफ्तर पहुंचे। इसे लेकर नगर निगम में दोपहर बाद तक गहमागहमी रही। शाम को अधिकारियों ने वार्ता पर मामले को सुलझाया। नगर निगम में अधिकारियों के आने जाने के लिए करीब 12 गाड़ियां लगी हुई हैं। सभी गाड़ियां एक ठेकेदार के जरिए सेवा में ली गई हैं। बताया जाता है कि अब तक गाड़ियों के संचालन पर हर महीने करीब 300 लीटर डीजल दिया जाता था। कोरोना संक्रमण के बाद खर्च में कटौती करने के मद्देनजर गाड़ियों का डीजल 75 लीटर कर दिया गया। इसे लेकर ड्राइवरों ने हड़ताल कर दी। ड्राइवर गाड़ियों को लेने ही नहीं पहुंचे। दफ्तर के समय तक जब गाड़ियां नहीं पहुंची, तो नगर निगम अफसरों के फोन आने लगे। इसके बाद अधिकारी अपने वाहनों से और पैदल चलकर दफ्तर पहुंचे। दोपहर में ड्राइवरों ने काफी देर तक नगर निगम परिसर में हंगामा किया। इसे लेकर अफसरों ने शाम को ठेकेदार को बुलाकर बात की और मामले को सुलझाया। डीजल में बढ़ोतरी करने की बात पर ड्राइवर माने। इसके बाद शाम को गाड़ियां अफसरों की सेवा में पहुंचीं। मामले को लेकर नगर निगम में चर्चा का आलम रहा।
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