झांसी। बुंदेलखंड में सूखे के संकट व रेलवे यार्ड में खड़ी पानी की ट्रेन से संबंधित कवरेज करने दिल्ली से आए इंडियन एक्सप्रेस के फोटोग्राफर की ओवर हैड इलेक्ट्रिक (ओएचई) की चपेट में आने से मौके पर ही झुलसकर मौत हो गई। 25000 वोल्ट की इस ओएचई लाइन के संपर्क में आते ही धमाका भी हुआ। फोटोग्राफर एक महिला पत्रकार के साथ कवरेज करने आए थे। घटना के बाद रेलवे ने रात में टैंकरों को वहां से हटाकर आगरा के लिए रवाना कर दिया।
फोटोग्राफर रवि कनौजिया (32) पुत्र रामचंद्र कनौजिया नोएडा के सेक्टर दस में स्थित अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में कार्यरत थे। वह लुधियाना के बैंक कॉलोनी गली नंबर दो नूर वाला रोड के रहने वाले थे। सोमवार को वह बुंदेलखंड में सूखे के दौरान पानी को लेकर चल रही राजनीति के बीच फंसे वाटर टैंकरों की कवरेज करने के लिए साथी महिला पत्रकार श्वेता दत्ता पत्नी डी दास गुप्ता निवासी अलखनंदा, नर्मदा अपार्टमेंट नई दिल्ली के साथ झांसी आए थे।
शाम करीब पांच बजे दोनों रेलवे यार्ड की आरडी लाइन नंबर दो में खड़े पानी से भरे दस वाटर टैंकरों की कवरेज करने पहुंच गए। कवरेज के दौरान फोटोग्राफर टैंकर क्त्रस्मांक सीआर 1916007 पर चढ़ गए और ढक्कन खोलकर पानी को देखने लगे, इसी दौरान वह ओएचई लाइन की चपेट में आ गए। करंट का स्पर्श होते ही तेज धमाका हुआ और वह धू- धूकर जलने लगे। करंट ने जैसे ही साथ छोड़ा वह सीधे नीचे गिट्टियों पर आ गिरे। हालांकि, तब तक वह बुरी तरह झुलस चुके थे।
कुछ देर में ही उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की खबर लगते ही रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आरपीएफ, जीआरपी व रेल कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। जीआरपी ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के उपरांत शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया।
हादसे ने खड़े किए कई सवाल
इस हादसे ने कई सवाल खड़े किए हैं। रेलवे ओएचई लाइन बोगी से पांच फुट ऊपर होती है। इसके संपर्क में आने से ही अनेक लोगों की मौत हो चुकी है। यह मानना कठिन है कि दोनों पत्रकारों को इसकी जानकारी न हो। गौरतलब है कि ओएचई लाइन में 25000 वोल्ट का करंट दौड़ता है और यह दो फुट दूर से ही खींचता है।
- प्रेस फोटोग्राफर रवि को अगर टैंकर की फोटो लेनी ही थी तो वह तो उनके पास ही खड़ा था। नीचे खड़े होकर आसानी से फोटो ली जा सकती थी।
- अगर टैंकरों की ऊपर से फोटो लेनी थी तो निश्चित ही वह रेलवे पुल या दूसरी किसी ऊंचाई वाली जगह का चयन कर सकते थे।
- अनुमान है कि फोटोग्राफर को नासमझी के कारण टैंकर पर चढ़ाया गया कि वह पानी का ढक्कन खोलकर देखकर आए कि पानी के साथ तेल तो नजर नहीं आ रहा है।