झांसी। कोतवाली के दीक्षित बाग में जेवर व नकदी से भरा थैला लूटने के मामले में पुलिस को अहम सुराग मिले हैं। ज्वैलर्स के ड्राइवर, उसके भतीजे समेत पांच लोगों को पुलिस ने हिरासत लिया है। पूछताछ से पता चला है कि लूट में ड्राइवर की मुख्य भूमिका थी। लूटे जेवर बरामद करने के लिए पुलिस दबिश दे रही है।
29 दिसंबर 2015 को साप्ताहिक बंदी के चलते दीक्षित बाग निवासी सर्राफा विवेक अग्रवाल ने अपनी दुकान पर काम करने वाले जितेंद्र व रवि को सोने के जेवर की सप्लाई और उधारी की उगाही के लिए ललितपुर भेजा था। सुरक्षा के चलते विवेक ने कार से दोनों को भेजा था, जिसे ड्राइवर आजाद यादव चला रहा था। रात करीब साढ़े दस बजे लौटकर आने के बाद कार गैराज के पास आकर खड़ी हुई। जितेंद्र व रवि ने गैराज खोला, जहां से दोनों बाइक संख्या यूपी93वाई- 3289 से ज्वैलर्स के घर जाने लगे। रास्ते में बाइक पर आए दो बदमाशों ने उनकी बाइक में लात मारकर दोनों को गिरा दिया।
जब तक वह संभले तब तक बदमाशों ने उनके ऊपर तमंचा तानकर लाखों रुपये के जेवर व करीब पांच लाख रुपये से भरा थैला लूट लिया। तमाम कोशिशों के बावजूद भी पुलिस को बदमाशों के बारे में कोई सुराग नहीं मिला, जिसके चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया। मई माह में यह मामला एकदम तब गर्मा गया जब पुलिस को पता चला कि लूटे जेवरात बेचने के लिए बदमाशों ने एक सर्राफ से संपर्क किया है।
मामले की जानकारी होने पर एसएसपी ने बदमाशों की धरपकड़ के लिए स्वॉट टीम को लगाया। पड़ताल से पता चला कि लूट में सर्राफा के ही ड्राइवर की अहम भूमिका थी। उसने वारदात की योजना अपने भतीजे राहुल यादव के अलावा प्रदीप व राजू के साथ मिलकर बनाई थी। वारदात को अंजाम देने के बाद लुटेरों ने नकदी का बंटवारा कर लिया, मगर जेवर को आजाद व राजू रखे रहे। तय हुआ कि जेवर का बंटवारा कुछ दिनों के बाद किया जाएगा।
दूसरी तरफ आजाद व राजू ने सिमराहा के एक सर्राफ से सोने के जेवरात को गलवाने के लिए संपर्क किया था। उसने कुछ जेवर गलाए भी थे, जो दोनों लेकर चले गए। पुलिस सूत्र बताते हैं कि स्वॉट टीम हिरासत में लिए गए दो लोगों के साथ लूटे गए जेवर बरामद करने के लिए कई स्थानों पर दबिश दे रही है। वहीं, इस संबंध में एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने कुछ भी बताने से इनकार किया है।