टहरौली थाना इलाके में छह साल पहले हुई हत्या के एक मामले में सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार की अदालत ने तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अर्थदंड भी लगाया, जिसमें से पचास फीसदी धनराशि मृतक की पत्नी को दी जाएगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार टहरौली के ग्राम घुरैया निवासी जयपाल सिंह ने दो मार्च 2011 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें उसने बताया था कि गांव के ही आशू, जयकरन व काशी प्रसाद और एरच पठा के कोमल व महेंद्र एक मार्च की रात तकरीबन नौ बजे उसके घर आए।
उस समय घर पर भाभी सविता, भाई निर्भय और चचेरा भाई मानवेंद्र बैठे हुए थे। खेत पर थ्रेसिंग के लिए वह लोग भाई निर्भय को अपने साथ ले गए। अगले दिन सुबह तक निर्भय घर वापस नहीं आया। जानकारी करने के लिए खेत पर पहुंचे, तो वहां रखी फसल और भाई जली हुई अवस्था में मिले। भाई के गले में तहमद का आधा जला फंदा भी डला मिला।
शिकायती पत्र में जयपाल ने पुलिस को बताया कि विपक्षियों से उसके भाई का कुछ दिन पहले भी विवाद हुआ था। इसी रंजिश के चलते उन्होंने भाई की हत्या कर दी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।
अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद अभियुक्त आशु, काशीप्रसाद और जयकरन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई। जबकि, कोमल व महेंद्र को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) मनीष सिंह यादव ने की।