झांसी। शहर के सूजे खां खिड़की इलाके में नाले की खुली पुलिया के होल में गिरकर मरने वाले राकेश कुशवाहा की मौत को अभी एक सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन नगर निगम ने इस मौत की जिम्मेदारी से बचने के लिए गैर जिम्मेदाराना रिपोर्ट तैयार कर ली है।
रिपोर्ट में निगम ने हवाला दिया है कि नगर में सीवर लाइन नहीं है, ऐसे में मेनहोल का सवाल ही पैदा नहीं होता। नगर निगम यह भूल गया है कि राकेश की मौत नाले की पुलिया के खुले होल में गिरने से हुई थी, जिस पर महीनों पहले आगाह किए जाने के बाद भी निगम ने जाल नहीं लगवाया था।
तेज बरसात होने के कारण 27 जुलाई को सूजे खां खिड़की में जलभराव था। यहां पर लगभग तीन माह से पुलिया के ऊपर लगे दो लोहे के जालों में से एक टूटा पड़ा था। इसकी खबर अमर उजाला ने मई माह में प्रकाशित की थी, लेकिन इसके बाद भी जाल को सुधरवाया नहीं गया था। जलभराव होने के कारण जाल के ऊपर से पानी बह रहा था। शाम करीब सात बजे पैदल जा रहा बड़ागांव गेट अंदर निवासी राकेश कुशवाहा टूटे पड़े जाल के कारण हुए होल में गिर गया था। पुलिया से निकल रहे पानी के तेज बहाव में वह बह गया था। इससे उसकी मौत हो गई थी।
इस पर मुहल्लावासियों ने श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर नगर निगम से 11 लाख रुपए मुआवजा मांगा था। लेकिन, नगर निगम राकेश कुशवाहा की मौत के लिए स्वयं को जिम्मेदार नहीं मानता है। अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बताया कि शहर में सीवर लाइन नहीं है, मेनहोल सीवर लाइन में ही बनाए जाते हैं, इसलिए राकेश की मौत के लिए नगर निगम जिम्मेदार नहीं है। नालियों को ढंकने के लिए पटिया लगाए जाते हैं, पुलिया के पटिया (जाल) टूट गया था। लोहे का जाल होने के कारण कई बार कबाड़ी उसे निकाल ले जाते हैं। इस बारे में जिलाधिकारी को भी बता दिया गया है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है।