यदि आप मनोरोगी हैं तो शस्त्र लाइसेंस नहीं बनेगा। लाइसेंस बनवाने के लिए मानसिक रूप से फिट होने का प्रमाणपत्र भी देना होगा। इस संबंध में शासन ने निर्देश जारी किए हैं।
शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक हटने के बाद से कलेक्ट्रेट के शस्त्र अनुभाग में आवेदन पत्र लेने वालों की भीड़ उमड़ रही है। अब तक लगभग दो हजार से अधिक लोग आवेदन कर चुके हैं। अब आवेदकों को आवेदन पत्र के साथ मानसिक रूप से फिट होने का प्रमाणपत्र भी देना होगा। यदि प्रमाण पत्र नहीं बन सका तो शस्त्र लाइसेंस बनवाना मुश्किल हो जाएगा। मनोचिकित्सक आवेदक की मनोस्थिति को परखेंगे और सवाल-जवाब करेंगे, यदि इसमें जरा भी कमी नजर आई तो प्रमाणपत्र किसी भी सूरत में जारी नहीं होगा। शस्त्र लाइसेंस जारी होने से पहले शासन ने टेस्ट कराने का निर्णय लिया है।
यह पूछे जाएंगे सवाल
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- आवेदकों से पूछा जाएगा कि वह शस्त्र लाइसेंस क्यों लेना चाहते हैं?
- शस्त्र लेने के बाद क्या करेंगे?
- अगर किसी से झगड़ा हो गया और आपके पास शस्त्र है तो आप क्या करेंगे?
- यह भी पता किया जाएगा कि व्यक्ति डिप्रेशन, शराब की लत, मंदबुद्धि, मनोविक्षिप्त, स्कीजोफ्रेनिया (मन का टूूटना), मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (बहुव्यक्तित्व विकार) आदि से पीड़ित तो नहीं हैं।
जल्दी गुस्सा तो नहीं आता और गुस्सा आने पर आपा तो नहीं खो देता।
यह दस्तावेज हो रहे जमा
लाइसेंस के आवेदन के दौरान अलग-अलग कई दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। हालांकि, आपको अपनी पहचान, पता, उम्र और फिटनेस प्रमाण पत्र भी देना होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि आप कौन सा शस्त्र खरीदना चाहते हैं। इसके अलावा अपनी तीन पासपोर्ट साइज की तस्वीरें भी लगेंगी।
शस्त्र लाइसेंस के आवेदकों से सवाल-जवाब किए जाएंगे। जिसमें देखा जाएगा कि वह किसी विशेष स्थिति में मन पर नियंत्रण रख सकते या नहीं। उनका मानसिक स्तर कैसा है। वह शस्त्र लेने के बाद इसका सही इस्तेमाल कर पाएंगे या नहीं। उनका मानसिक टेस्ट कराया जाएगा। मनोस्थिति का जायजा लेने के बाद ही कोई निर्णय लेकर प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। - डॉ. ज्ञानेेंद्र कुमार, मानसिक रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
शासन का यह निर्णय अच्छा है, इससे मानसिक रोगी लाइसेंस नहीं ले सकेंगे। किसी भी प्रकार के हादसे का डर भी नहीं होगा। ऐसे लोग कभी भी आवेश में आकर किसी तरह की घटना को अंजाम दे सकते हैं। - शमीम खान, अधिवक्ता।