एक पखवाड़े बाद नवरात्र की शुरुआत के साथ ही त्योहारी सीजन प्रारंभ होते ही खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाएगी। इस सीजन में मिलावटखोर भी सक्रिय रहते हैं, जो महंगे खाद्य पदार्थों में सस्ती चीजों की मिलावट कर आम आदमी की जेब और सेहत दोनों पर चोट पहुंचाते हैं। ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। यदि आपको मिलावट की शंका होती है तो महज एक हजार रुपये खर्च कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला में इसकी जांच करा सकते हैं। हाल ही में प्रयोगशाला को नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड ऑफ लेबोरेट्री (एनएबीएल) की मान्यता भी मिल गई है। इससे अब इसकी रिपोर्ट पर विधिक कार्रवाई भी होगी।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने छह साल पहले महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज परिसर में जन विश्लेषक प्रयोगशाला की स्थापना की थी लेकिन एनएबीएल से प्रमाणित न होने की वजह से प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट को विधिक मान्यता नहीं थी। यानी कि प्रयोगशाला में हुई जांच में मिलावट पाए जाने पर दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाती थी। यहां से सूचना एफडीए को भेज दी जाती थी। एफडीए दुबारा से नमूना एकत्र कर जांच के लिए लखनऊ भेजता था। गड़बड़ी पाए जाने पर तब जाकर कार्रवाई होती है लेकिन अब अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने पर 16 अगस्त को प्रयोगशाला को एनएबीएल ने प्रमाणित कर दिया है।
इससे यहां से जारी होने वाली रिपोर्ट के आधार पर मिलावटखोर के खिलाफ सीधी कानूनी कार्रवाई होगी। प्रयोगशाला में कोई भी व्यक्ति किसी भी खाद्य पदार्थ के नमूने की जांच करा सकता है। इसके लिए उसे एक हजार रुपये शुल्क अदा करना होगा। इसके अलावा खाद्य पदार्थ कहां से आया है, इसका भी ब्योरा देना होगा। दो-तीन दिन के भीतर लैब से रिपोर्ट संबंधित व्यक्ति को दे दी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर खाद्य पदार्थ के विक्रेता, उत्पादक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
फैजाबाद और गोरखपुर के नमूनों की होगी जांच
एनएबीएल की मान्यता मिलने के बाद एफडीए ने प्रयोगशाला को दो मंडल फैजाबाद और गोरखपुर आवंटित कर दिए हैं। यानी कि उक्त दोनों मंडलों के सभी जनपदों में एफडीए द्वारा जितने भी नमूने एकत्र किए जाएंगे, उन्हें जांच के लिए झांसी की प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।
जन विश्लेषक प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर अब तक विधिक कार्रवाई का प्रावधान नहीं था लेकिन एनएबीएल से प्रमाणित होने के बाद अब नमूना फेल होने पर सीधे विधिक कार्रवाई की जा सकेगी। आम आदमी के लिए भी खाद्य पदार्थ की जांच की सुविधा है।
- अतुल उपाध्याय, प्रयोगशाला प्रभारी /सहायक आयुक्त - एफडीए
दूध में पानी की धार
जनपद में दूध में पानी की खूब मिलावट हो रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एफडीए ने अप्रैल से अगस्त तक 95 खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच कराई। इनमें 75 नमूने दूध के थे, जो फेल हुए। सभी मामलों में दूध में पानी की मिलावट पाई गई। इसके अलावा अन्य पैकेज्ड आइटमों में गड़बड़ी मिली। अभिहित अधिकारी राजेश द्विवेदी ने बताया कि उक्त मामलों में 32 लाख रुपये का अर्थदंड वसूला गया है।