झांसी। नवाबाद थानांतर्गत कोछाभांवर में शनिवार की दोपहर घर में घुसे बदमाश तमंचे के बल पर दो बच्चों को बंधक बनाकर जेवर व नकदी लूटकर ले गए। आंगनबाड़ी से पढ़कर लौट रहे छोटे-छोटे बच्चों को रास्ते में मिले बदमाशों ने अपना परिचय मामा के रूप में दिया तथा उनके साथ घर पर आ गए। मकान में किसी बड़े को न पाकर वे अंदर आते ही अपने असली रूप में आ गए। वहीं, विश्वविद्यालय चौकी पुलिस मामले को लूट न मानकर चोरी का बता रही है।
कोछाभांवर निवासी संदीप मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करता है। शनिवार को संदीप के काम पर जाने के बाद पत्नी नीलम प्राइवेट अस्पताल में काम करने चली गई। सुबह उसकी 10 वर्षीय बेटी मोनिका और आठ वर्षीय पुत्र प्रिंस आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने के लिए चले गए थे। दोपहर करीब 12 बजे मोनिका और प्रिंस पढ़कर घर लौट रह थे, इसी दौरान रास्ते में बाइक पर सवार दो बदमाश उन्हें मिल गए, उन्होंने दोनों बच्चों को रोककर कहा कि वह उनके मामा हैं, उनके पिता ने घर पर भेजा है। दोनों बदमाशों के झांसे में आकर बच्चे बाइक पर बैठ गए।
घर आने पर जब दरवाजा खोलकर बच्चे अंदर घुसे तो दोनों बदमाश भी अंदर आ गए। दरवाजा अंदर से बंद करके बदमाश अपने असली रूप में आ गए। उन्होंने तमंचा निकालकर बच्चों को कब्जे में करके मुंह बंद रखने की धमकी दी। एक बदमाश उनके पास खड़ा रहा और दूसरे ने घर की तलाशी लेना शुरू कर दिया। बदमाश अलमारी में रखे दो मंगलसूत्र, दो चांदी की हाफ पेटी, सोने की बीजासेन और मजदूरी करके जोड़े गए 12 हजार रुपये लूट कर ले गए।
वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाशों ने अपनी जेब से नकली ज्वैलरी से भरा पर्स निकालकर बच्चों को देते हुए कहा कि मम्मी घर पर आए तो कहना मामा दे गए हैं। इसके बाद वह भाग निकले। कुछ देर बाद जब नीलम घर पर आई तो बच्चों ने पूरे मामले की जानकारी दी। घर का सामान बिखरा देख वह हक्कीबक्की रह गई। उसने बदमाशों द्वारा दिया गया पर्स खोलकर देखा तो उसके अंदर नकली जेवर रखे थे। पीड़िता ने इस मामले की शिकायत बुंदेलखंड विश्वविद्यालय पुलिस से की।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मौका मुआयना किया। चौकी इंचार्ज ओपी यादव ने बताया कि संदीप के घर पर लूट की वारदात नहीं हुई बल्कि चोरी हुई है।