फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस को खल रही शुरूआती समय की बर्बादी

Sat, 15 Oct 2016 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
loot news jhansi - फोटो : demo
विज्ञापन
कैश मैनेजमेंट कंपनी के कर्मचारियों ने अगर लूट के तत्काल बाद पुलिस को सूचित कर दिया होता तो शायद लुटेरे पकड़े जाते। लेकिन, उन्होंने ऐसा करने में लगभग दस मिनट का समय लगा दिया। इतने समय में ही बदमाशों ने छह किलोमीटर महेबा खेरा में कार छोड़ी और अन्य साधन से भाग निकले।
विज्ञापन

चिरगांव बाईपास पर हुई लूट की वारदात का शिकार बने राकेश कुमार, राजेश परिहार और संजीव सिंह ने हिरासत में पुलिस को बताया कि बदमाशों के जाने के बाद वह तीनों घबराए हुए थे। कुछ देर संभलने के बाद उन्होंने टोल टैक्स प्लाजा के मैनेजर को फोन पर वारदात की जानकारी दी। इसमें करीब दो-तीन मिनट लग गए।
  पुलिस कंट्रोल रूम 100 पर फोन मिलाया, जो नहीं मिला। दूसरी बार मिलाने पर फोन उठा तो पुलिस को वारदात की जानकारी दी। घटना स्थल से चिरगांव थाने की दूरी करीब ढाई-तीन किलोमीटर है। सूचना मिलने के पांच-छह मिनट में पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बदमाशों की तलाश करने के जगह तीनों से पूछताछ की, जिसमें भी समय बर्बाद हुआ।
विज्ञापन

घटना के करीब 15 मिनट बाद पुलिस हरकत में आई, तब तक बदमाश कार को घटना स्थल से छह किलोमीटर दूर महेबा खेरा में छोड़ कर अन्य साधन से नोटों से भरे बैग लेकर भाग गए थे। शुरूआती समय की बर्बादी अब पुलिस को खल रही है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित तत्काल सूचित करते तो नाकेबंदी करके बदमाशों को पकड़ा जा सकता था। हालांकि, घटना स्थल से छह किलोमीटर दूर खड़ी कार तलाशने में 24 घंटे से अधिक समय लगना भी पुलिस की तत्परता पर सवालिया निशान लगा रहा है।
इंसेट
सिर्फ हरे रंग की कार तलाशी गई
नाकाबंदी करके पुलिस ने बदमाशों को तलाश करने के बजाए सिर्फ हरे रंग की मारुति कार तलाशी। यदि पुलिस कड़ाई से सभी वाहनों की बैरियर लगाकर चेकिंग करती तो निश्चित बदमाश ज्यादा दूर नहीं पहुंच सकते थे। चूंकि वायरलेस पर बार-बार कार का नंबर और रंग फ्लैश किया जा रहा था, इसलिए पुलिस को सारा ध्यान हरे रंगी की मारुति कार पर ही था।
इंसेट
कैश मैनेजमेंट कंपनी के रीजनल हैड ने दर्ज कराई रिपोर्ट 
झांसी। चिरगांव बाईपास तिराहा के पास दिनदहाड़े हुई लूटपाट की रिपोर्ट बृहस्पतिवार देर रात रेडिएंट कैश मैनेजमेंट कंपनी (आरसीएमएस) के लखनऊ से आए रीजनल हैड रिटायर्ड कर्नल एके प्रसाद ने दर्ज कराई।

ये हैं जांच के बिन्दू
1- बदमाशों ने मारपीट करने के बाद नकदी और कार लूटी मगर तीनों कर्मियों के मोबाइल क्यों नहीं ले गए, जबकि बदमाश पहले मोबाइल लूटता है, ताकि पुलिस को सूचना न दी जा सके। 
2- करीब 10 मिनट बर्बाद करने के बाद तीनों कर्मियों ने सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना क्यों नहीं दी। टोल प्लाजा मैनेजर को क्यों बताया गया। 
3- महेबा खेरा के जंगल में जिस जगह पर पुलिस को कार खड़ी मिली, वहां की मिट्टी में पहियों के निशान देखकर पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बदमाश यहां से किस वाहन में भागे।
4- पुलिस ने टोल प्लाजा पर काम करने वाले क्षेत्रीय कर्मियों की सूची लेकर उनके मोबाइल नंबरों को खंगाल रही है, जिससे मुखबिर के बारे में पता चल सके।

कैश मैनेजमेंट कंपनी ने नहीं कराया वेरीफिकेशन, होगी कार्रवाई
करोड़ों रुपये बैंक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेने वाली कैश मैनेजमेंट कंपनी ने अपने कर्मियों का वेरीफिकेशन नहीं कराया था। यह बात पुलिस जांच में सामने आयी है। एसएसपी ने कहा कि कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
रेडिएंट कैश मैनेजमेंट कंपनी के कर्मी संजीव को 6230, राजेश परिहार को 6500 और राकेश को 7380 रुपये प्रतिमाह पगार मिलती थी। यह बात खुद उन्होंने पुलिस को बताई है। कंपनी ने उनका वेरीफिकेशन नहीं कराया था। उधर, कंपनी के अफसरों का दावा है कि वह 28 हजार रुपये प्रति माह वाहन खर्च और 400 रुपये प्रतिदिन सिक्योरिटी का खर्च उन्हें देते हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद का कहना है कर्मियों का वेरीफिकेशन न कराना तथा रुपयों को बिना सुरक्षा के ले जाना घोर लापरवाही है। मामले में कुछ सफलता हाथ लगने के बाद कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इधर, कंपनी के रीजनल अधिकारी एके प्रसाद ने किसी भी मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें