झांसी। महिला से गैंगरेप के आरोपी का रसूख कहें या फिर कोई दूसरी वजह, जो भी हो उसे डेढ़ माह गुजरने के बाद भी पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया है। हां, इतना जरूर है कि पुलिस ने पड़ताल से पता किया है कि पीड़िता दलित नहीं मुस्लिम है, इस आधार पर मुकदमे से एससीएसटी एक्ट हटा दिया है।
एक महिला ने स्वयं को दलित बताकर जून में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि घास मंडी बड़ा बाजार निवासी अंशू लिखधारी ने दिसंबर 2015 में आर्य कन्या इंटर कालेज के पास दूसरे घर बुलाया था, जहां डरा धमकाकर बलात्कार किया और ब्लैकमेल करने लगा। उसके दोस्त चंद्रशेखर शुक्ला एडवोकेट ने बंदूक के बल पर बलात्कार किया। तब से दोनों उसकी इज्जत से खेलते रहे। पहले वह लोक लाज के भय से खामोश रही, बाद में तंग पहले अपने पति से और बाद में एसएसपी से शिकायत की। महिला थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर अंशु लिखधारी को जेल भेज दिया।
एसएसपी ने दावा किया था कि दूसरे आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने तलाश करने के लिए पुलिस टीमों को लगाया। हैरानी की बात है कि पुलिस टीमें आज तक दूसरे आरोपी को तलाश नहीं सकी हैं। सूत्रों की माने तो आरोपी के रसूख की वजह से पुलिस गिरफ्तारी से बच रही है। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि आरोपी की तलाश की जा रही है, मगर अभी तक उसका कोई सुराग नहीं लग सका है। जांच में पता चला है कि पीड़िता दलित नहीं मुस्लिम है। इस वजह से एससीएसटी एक्ट हटा लिया गया है।