झांसी। छात्राओं के फेसबुक अकाउंट पर हैकरों की नजर है। जो अकाउंट से फोटो व पर्सनल जानकारी चोरी करने के बाद नकली अकाउंट बनाकर चला रहे हैं। इस तरह की बड़ी संख्या में शिकायतें साइबर सेल के पास पहुंची हैं। ऐेसे मेें शिकायत के बाद साइबर सेल पड़ताल कर रही है। इस माह करीब आठ मामले पुलिस के पास पहुंचे हैं।
युवाओं में फेसबुक व वाट्सएप को लेकर लेकर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। जिसमें सबसे ज्यादा क्रेज छात्राओं में है, लेकिन जरा सी लापरवाही के चलते हैकर उनके नाम के फर्जी अकाउंट बना रहे हैं। साइबर सेल में फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाने और उन पर अश्लील कमेंट्स एवं फोटो अपलोड करने की शिकायतें अधिक आ रही हैं। युवतियों की फर्जी फेसबुक आईडी बनाने का काम नजदीकी द्वारा करने के मामले भी आ रहे हैं। हाल ही में आए कुछ मामलों में साइबर सेल ने छानबीन की तो आईपी एड्रेस दूसरे देश का भी निकला। एक छात्रा ने शिकायत करते हुए बताया कि एक दोस्त ने ही उसका फेसबुक पर अकाउंट बना लिया, अब वह उसे परेशान कर रहा है। रिश्तेदारों से दूसरी आईडी बनाने की जानकारी मिली। पड़ताल करने के बाद आईडी देखकर वह परेशान हो गई। परिजनों से शिकायत कर पुलिस को बताया, जहां जांच में उसका दोस्त सामने आया। पुलिस के सामने माफी मांग लेने के बाद मामला खत्म हो गया।
इसी तरह, एक छात्रा ने पुलिस को बताया था कि किसी ने फोटो लगाकर उसकी हुबहू आईडी बना ली, जो उसके सहेलियों से अश्लील मेसेज कर कई जानकारियां ले रहा है। यहां भी पुलिस से शिकायत के बाद पोल खुलने पर पता चला कि उसके भाई के दोस्त ने ही आईडी बनाई। इसी तरह, कई ऐसे मामले भी हैं, जहां छात्राओं की आईडी बना ली गई। थानों की मदद से साइबर सेल जांच कर रही हैं।
यह बरतें सावधानी
- किसी के भी मोबाइल में अपना अकाउंट न खोलेें
- मोबाइल में हमेशा पासवर्ड डालकर रखें
- साइबर कैफे पर अकाउंट खोलने के बाद सतर्कता के साथ बंद करें
- किसी को भी अपने अकाउंट का पासवर्ड न बताएं
- फेसबुक पर सोच समझकर ही अपरिचित को दोस्त बनाएं
- पर्सनल जानकारियां किसी भी कीमत पर शेयर न करें
सात साल तक की सजा
फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाने पर पुलिस द्वारा आईटी एक्ट की धारा 66 (ए) और आईपीसी की धारा 420, 467, 469 और 471 के तहत मामला दर्ज किया जाता है। जिसमें अलग - अलग धाराओं में अलग - अलग सजा है। आईटी एक्ट की धारा में कम से कम तीन साल की सजा है। कुल मिलाकर आरोपी को लगभग सात साल की सजा हो सकती है।
सुराग लगाना थोड़ा मुश्किल
ऐसे मामलों में कार्रवाई करने में काफी वक्त लगता है। दरअसल, ऐसे मामलों की जांच में आईपी एड्रेस का कोड दूसरे देश का आता है। साइबर सेल द्वारा शिकायत के आधार पर फेसबुक मुख्यालय को ई - मेल के द्वारा संबंधित अपराध का ब्योरा भेजा जाता है। उसके बाद वहां से एक टोकन नंबर आता है। ई - मेल का जवाब आने में ही करीब एक माह तक लग जाता है। हालांकि, साइबर सेल की टीम प्रारंभिक स्तर पर ही पीड़ित का फेसबुक अकाउंट बंद कर उसका पासवर्ड भी बदल देती है। ऐसे मामलों में आरोपियों का सुराग लगाना मुश्किल होता है।
सोशल नेटवर्किंग साइट पर अकाउंट बनाते समय सावधानी बरतना जरूरी है। पर्सनल फोटो और अन्य जानकारियां अपलोड न करें और किसी के साथ भी साझा न करें। ऐसे मामलों में पुलिस पड़ताल कर रही है।
राहुल मिठास, अपर पुलिस अधीक्षक