इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे की जांच में जीआरपी के सवालों के जवाब देने में इंजीनियरिंग विभाग (रेल पटरी की सुरक्षा से जुड़े) के अफसरों का पसीना छूट रहा है। हालांकि, जांच में सीएंडडब्लू विभाग (बोगियों से जुड़े) अफसरों का सहयोग सकारात्मक बना हुआ है। अभी तक डेढ़ सौ लोगों के बयान जीआरपी दर्ज कर चुकी हैं। जीआरपी ने विशेषज्ञों से राय लेकर अपने सवाल तैयार किए हैं।
20 नवंबर को तड़के 3.03 बजे पुखरायां और मलासा के बीच इंदौर-पटना एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। 14 डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसमें 152 यात्रियों की मौत व 200 से अधिक जख्मी हो गए थे। जीआरपी ने अज्ञात रेल कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। अभी तक हादसे में घायल, मृतकों के परिजनों के अलावा रेलवे के इंजीनियरिंग व सीएंडडब्लू विभाग के कई अफसर व कर्मचारियों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। हादसे के दिन ट्रेन संचालन व कर्मचारियों से जुड़ा हर रिकार्ड भी मांग लिया गया है। हालांकि, हादसे की रात ट्रेन चला रहे ड्राइवर बयान देने अभी नहीं पहुंचे है। गार्ड व लोको इंस्पेक्टर के बयान जरूर हो गए हैं।
चूंकि, पूरी जांच रेल पटरियों व बोगियों पर टिकी हुई हैं। इस कारण जीआरपी ने विशेषज्ञों की राय लेकर सवाल तैयार किए हैं। सवालों की संख्या तीस से अधिक हैं। इसमें इंजीनियरिंग की पटरियों व सीएंडडब्लू विभाग की बोगियों से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं। सवालों में संरक्षा के हर बिंदु का ध्यान रखा गया है। अब इंजीनियरिंग विभाग के जिन भी अफसरों से पूछताछ की गईं, उनको सवालों के जवाब देने में पसीने छूट गए। हर अफसर दुबारा तैयारी के साथ आकर नई तिथि लेकर चला गया। वहीं, जीआरपी अफसर अभी जांच की प्रगति में कुछ भी बताने से बच रहे हैं।
यह सवाल किए हैं परेशान
- रास्ते में किन-किन स्टेशनों में ट्रेन के प्रवेश व निकलते समय जांच हुई?
- झांसी-पुखरायां के बीच कॉशन आर्डर लेकर क्यों ट्रेनें चलाई जा रही थी?
- बोगियों की ओवर हालिंग कब से नहीं हुई?
- पुखरायां व मलासा स्टेशनों के बीच पटरियों के बदलने का समय हो चुका था, तो उनको अभी तक क्यों नहीं बदला गया?
- रेल सेक्शन में रात में पेट्रोलिंग करवाई जा थी कि नहीं?
- हादसे के पूर्व अल्ट्रासॉनिक मशीनों से पटरियों की जांच क्यों नहीं करवाई जा रही थी?