झांसी। रोजगार सेवक रविंद्र परिहार की आत्महत्या के मामले में मनरेगा उपायुक्त पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को रोजगार सेवकों ने विकास भवन में जमकर प्रदर्शन किया। वह नारेबाजी करते हुए दिन भर यहां डेरा डाले रहे। बाद में सीडीओ द्वारा जांच कमेटी गठित करने व दो दिन में जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का भरोसा दिए जाने पर रोजगार सेवक माने।
ब्लाक बामौर के ग्राम दुरखुरु के रोजगार सेवक रविंद्र परिहार ने विगत दिवस फांसी लगातार आत्महत्या कर ली थी। मृतक रोजगार सेवक के पास से मिले सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए मनरेगा उपायुक्त को जिम्मेदार ठहराया गया था। इससे गुस्साए रोजगार सेवक बृहस्पतिवार की सुबह ग्राम रोजगार सेवक संघ के बैनर तले विकास भवन में जमा हो गए। नारेबाजी करते हुए उन्होंने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इस दौरान रोजगार सेवकों ने मांग रखी कि उपायुक्त मनरेगा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए। रोजगार सेवकों के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करने वाले बीडीओ गुरसरांय को निलंबित किया जाए। मृतक के परिवार के किसी सदस्य को रोजगार सेवक पद पर नियुक्ति दी जाए। इस दौरान अधिकारियों ने रोजगार सेवकों को कई बार समझाने का प्रयास किया, परंतु वह नहीं माने।
यह शिकायत लेकर वह मंडलायुक्त के पास भी गए। बाद में सीडीओ द्वारा मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई। साथ ही रोजगार सेवकों को आश्वासन दिया गया कि दो दिन में जांच पूरी करने के बाद कमेटी की रिपोर्ट अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस पर रोजगार सेवक मान गए और उन्होंने अपना धरना समाप्त कर दिया।
इस मौके पर ग्राम रोजगार सेवक संघ जिलाध्यक्ष बरजोर सिंह यादव, दिनेश यादव, वीरेंद्र कुमार, नाथूराम आर्य, मुकेश कुमार आदि समेत दर्जनों रोजगार सेवक मौजूद रहे।
चार सदस्यीय होगी जांच कमेटी
मुख्य विकास अधिकारी चंद्र विजय सिंह ने बताया कि उक्त मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसमें उप जिलाधिकारी गरौठा, परियोजना निदेशक, जिला पंचायत राज अधिकारी व ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष को शामिल किया गया है। कमेटी को दो दिन में जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
रोजगार सेवकों ने बताई अपनी पीड़ा
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हर माह नहीं मिलता मानदेय
बामौर के ग्राम बरनपुरा के रोजगार सेवक सुनील यादव ने बताया कि रोजगार सेवकों को केवल 3600 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। लेकिन, यह हर माह नहीं मिलता। स्थिति यह है कि मानदेय के लिए रोजगार सेवकों को चार से छह महीने तक का इंतजार करना पड़ जाता है।
ग्राम प्रधान कराते हैं बेगारी
ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष बरजोर सिंह यादव ने बताया कि ग्राम रोजगार सेवक तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मनरेगा के कार्यों के अलावा उन्होंने ग्राम प्रधानों की भी बेगारी करनी पड़ती है। विरोध करने पर हटाने का दबाव बनाया जाता है।
बढ़ता जा रहा है काम का बोझ
चिरगांव ब्लाक के ग्राम सिया के रोजगार सेवक विजय गुप्ता ने बताया कि रोजगार सेवकों की नियुक्ति मनरेगा के लिए हुई है, लेकिन उनसे विधवा, विकलांग, समाजवादी पेंशन आदि समेत विभिन्न सरकारी कार्य लिए जा रहे हैं, जिससे रोजगार सेवकों पर दिनों दिन काम का बोझ बढ़ता जा रहा है।
हटाने की दी जा रही है धमकी
ब्लाक गुरसराय के ग्राम ढिबकई के रोजगार सेवक अभिषेक सिंह ने बताया कि वह रोजगार सेवक भले ही हैं, परंतु उनके खुद के रोजगार की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने बताया विभाग से उन्हें लगातार हटाने की धमकी मिल रही है। इसके एवज में पचास हजार रुपये की मांग की जा रही है।