जिले में दलित उत्पीड़न लगातार जारी है। 31 माह में पुलिस ने 326 मामले दर्ज किए हैं। औसतन हर तीसरे दिन एक दलित का उत्पीड़न हुआ। इन मामलों में पीड़ितों को तीन करोड़ से अधिक का मुआवजा भी दिया जा चुका है।
दलित उत्पीड़न रोकने के लिए शासन के स्पष्ट आदेश हैं, लेकिन जिले में यह मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वर्ष 2016 में 110 मुकदमे दर्ज हुए थे। वर्ष 2017 में इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। इस वर्ष 141 मामले पुलिस ने दर्ज किए। वहीं, 2018 में 31 जुलाई तक 93 मामले पुलिस ने दर्ज किए हैं। वर्ष के आखिरी तक यह संख्या बढ़ी है। वर्ष 2016 और 2017 के मामलों में पीड़ित को दो करोड़ 28 लाख 24500 रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं, वर्ष 2018 के अब तक मामलों में 93 लाख मुआवजा बांटा गया है।
बुुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप बौद्ध ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट के कारण ही दलित समाज के लोग मान सम्मान के साथ जी रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि एससी-एसटी एक्ट का समाज के लोग दुरुपयोग नहीं कर रहे हैं। वहीं, एसएसपी डॉ. ओपी सिंह का कहना है कि शिकायत आने पर रिपोर्ट दर्ज की जाती है। कई मामलों में जांच भी चल रही है।
क्या है कारण
दलित उत्पीड़न के मामलों की बढ़ती संख्या के पीछे जागरूकता एक बड़ा कारण माना जा रहा है। उत्पीड़न होने पर लोग सीधे पुलिस थाने में शिकायत करते हैं। दुष्कर्म-छेड़छाड़ जैसे मामलों की संख्या बढ़ी है।
इस तरह मिलता मुआवजा
- हत्या-दलित परिवार के कमाऊ व्यक्ति की हत्या पर आठ लाख 25 हजार रुपये मिलते हैं। गैर कमाऊ या नाबालिग की हत्या पर चार लाख 12 हजार 500 रुपये मुआवजा मिलता है। आधी मुआवजा राशि रिपोर्ट दर्ज होने पर और आधी राशि चार्जशीट दाखिल होने पर मिलती है।
- गैंगरेप-पीड़िता को गैंगरेप पर चार लाख रुपये मुआवजा मिलता है। रेप पर दो लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। मारपीट और गाली गलौज पर एक लाख रुपये मुआवजा है। रिपोर्ट लिखाने पर 10 फीसदी राशि, चार्जशीट दाखिल होने पर 25 फीसदी और शेष राशि मुकदमे में फैसला आने पर मिलता है।
यह रहे मामले
वर्ष 2016 व 2107 के मामले
दुष्कर्म - 28
हत्या - 44
मारपीट - 104
अन्य - 75
कुल - 251
वर्ष 2018 (जुलाई तक)
दुष्कर्म - 10
हत्या - 8
मारपीट - 44
अन्य - 31
कुल - 93