रेलवे की नौकरी दिलाने के नाम पर शहर क्षेत्र में रहने वाली एक युवती व बड़ागांव थाना क्षेत्र के बराठा गांव का युवक ठगी का शिकार हो गए। बृहस्पतिवार को दोनों फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर सहायक कार्मिक अधिकारी के पास पहुंचे तो मामला खुल गया। आरपीएफ ने रेलवे अस्पताल के दो चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को पकड़कर नवाबाद थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया। जबकि, मुख्य आरोपी अभी फरार है।
बृहस्पतिवार को दतिया के एक नर्सिंग स्कूल में पढ़ने वाले युवक-युवती ने डीआरएम कार्यालय के कार्मिक ऑफिस पहुुंचकर सहायक कार्मिक अधिकारी (एपीओ) से मुलाकात की। दोनों ने डीआरएम की मोहर व हस्ताक्षर किए नियुक्ति पत्र उन्हें दिखाते हुए कहा कि उनकी नई नियुक्ति हुई हैं, वे ज्वाइन करने आए हैं। एपीओ ने जांच में नियुक्ति पत्र फर्जी पाए व इस बात की जानकारी आरपीएफ कमाडेंट आशीष मिश्रा को दी। आरपीएफ कमांडेंट की सूचना पर इंस्पेक्टर राजीव उपाध्याय फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
आरपीएफ को पूछताछ में दोनों ने बताया कि रेलवे कॉलोनी में रहने वाले आशीष यादव नामक व्यक्ति के वे संपर्क में आए थे। उसने उनको रेलवे अस्पताल में नर्स बनवाने का वादा किया था। बदले में दोनों को डेढ़ लाख रुपये देने थे। इसमें युवती 20 हजार व युवक 75 हजार रुपये दे चुका है। रेलवे अस्पताल में बाकायदा उनका एक डॉक्टर के चैंबर में मेडिकल भी कराया गया। इसके बाद आरपीएफ दोनों को लेकर रेलवे अस्पताल में पहुंची, जहां उन्होंने चपरासी नारायण व राजेश की पहचान की, जो मेडिकल कराते समय मौजूद थे। यह बात भी सामने आई कि राजेश ने डॉक्टर बनकर मेडिकल का इंटरव्यू लिया था। बाद में आरपीएफ ने उनको नवाबाद थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने एपीओ की तहरीर पर राजेश, नारायण व आशीष के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस फरार आरोपी आशीष की तलाश कर रही है।