झांसी। दीक्षित बाग में डेढ़ माह पूर्व जेवर व नकदी से भरा थैला लूटने की वारदात में शामिल बदमाश के चिह्नित होने के बाद भी खुलासा नहीं होने पर एसएसपी ने सख्त रुख अपना लिया है। मंगलवार को उन्होंने कोतवाली पुलिस की भूमिका और विवेचक के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश कर दिए हैं।
ज्ञातव्य हो कि 29 दिसंबर को सर्राफा कारोबारी विनीत अग्रवाल ने अपनी दुकान पर काम करने वाले रवि व जितेंद्र को सोने के जेवरों की सप्लाई और वसूली के लिए कार से ललितपुर भेजा था। दोनों ने वहां पर करीब पांच लाख रुपये की वसूली की।
लौटने पर रात करीब 10 बजे चालक ने कार को गैराज में खड़ा कर दिया, जहां से दोनों बाइक से कारोबारी के घर जाने को निकले। रास्ते में तीन बदमाशों ने बाइक रुकवाकर तमंचे के बल पर जेवर व नकदी से भरा बैग लूट लिया।
खुलासे में जुटी कोतवाली पुलिस को एक सप्ताह बाद भनक लगी कि लूट में शामिल बदमाश अपनी जमानत रद्द करवाकर जेल चला गया है। जब पुलिस ने उससे जेल में पूछताछ की तो उसने लूट को स्वीकार कर अपने दो साथियों के नाम बता दिए।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिन साथियों के नाम जेल में बंद बदमाश ने बताए हैं, वह जांच में गलत निकले हैं।
पुष्ट सूचना के बावजूद लूट का अभी तक खुलासा नहीं होने से सर्राफा कारोबारियों में रोष है।
विगत दिनों सर्राफा कारोबारियों ने एसएसपी सभा राज से कोतवाली पुलिस की कार्यशैली को लेकर शिकायत की। इस पर मंगलवार को एसएसपी ने विवेचक को तलब किया। जब वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सके तो उनकी भृकुटी तन गईं।
उन्होंने बदमाश चिह्नित होने के बावजूद वारदात का खुलासा नहीं होने पर आपत्ति जताते हुए कोतवाली पुलिस की भूमिका और विवेचक की प्रारंभिक जांच के आदेश कर दिए।