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साइबर क्राइम का मास्टर माइंड गिरफ्तार

Mon, 22 Jun 2015 12:49 AM IST
झांसी / ब्यूरो
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जिला पुलिस की साइबर यूनिट ने बैंक अधिकारी बनकर लोगों के खातों से नकदी उड़ाने वाले झारखंड के साइबर क्राइम गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है। गिरफ्तार सरगना ने गिरोह के कई लोगों के नामों का खुलासा करते हुए बताया कि वह सेकेंडों में ऑन लाइन खरीददारी करके सामान की सप्लाई दूसरी जगह कर लेते हैं। सामान औने पौने दामों में बेच देते हैं। उसने खुलासा किया कि झारखंड में दर्जनों गिरोह काम कर रहे हैं।
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एसपी सिटी राजेश कुुमार ने बताया कि 16 मई को कोतवाली के आंतियां तालाब निवासी प्रशांत साहू ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि एक व्यक्ति ने स्टेट बैंक आफ इंडिया का अधिकारी बनकर एटीएम कार्ड पर लिखे 16 अंक पूछे और फिर बातों में लगाकर मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी नंबर को पूछा और सेकेंडों में खाते से 19500 रुपये की ऑनलाइन शॉपिंग कर डाली। जब खाते से रुपये निकलने का बैंक से एसएमएस आया तो उसके होश उड़ गए।  शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली। इस तरह की लगातार आ रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी किरन एस ने सीओ क्राइम सुबोध गौतम के नेतृत्व में साइबर यूनिट को गिरोह का भंडाफोड़ करने के लिए लगाया। जब साइबर यूनिट ने फोन नंबर को खंगालकर मोबाइल फोन की ईएमआई पता की, जिसकी लोकेशन झारखंड के जिला जामताड़ा के थाना कर्माताड़ में मिली।
इस पर जामताड़ा पहुंची टीम ने सुधीर कुमार पुत्र मोहन साहू को गिरफ्तार कर कोर्ट से ट्राजिस्ट रिमांड पर लिया। पूछताछ में सुधीर ने खुलासा किया कि थाना कर्माताड़ के 30-40 गांव के लोग कई वर्ष से साइबर अपराध करके करोड़ों रुपये कमा चुके हैं। उन्हें देखकर वह भी साइबर अपराध की दुनिया में कूद गया। उसने बताया कि एटीएम कार्ड की जानकारी प्राप्त कर ईवे कंपनी के माध्यम से उसने 16200 रुपये में मोबाइल की खरीददारी की, जिसकी डिलीवरी के लिए बुकारो शहर चुना। उसने मंगेतर के साथ बुकारो पहुंचकर फोन की डिलीवरी ली।
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250 देने पर होता है 500 का रीचार्ज
गिरफ्तार सुधीर ने बताया कि कर्माटांड क्षेत्र में 250 रुपये का मोबाइल रीचार्ज कराने पर 500 रुपये का रीचार्ज होता है। साइबर क्राइम में 15 से 30 वर्ष तक के युवा काफी संख्या में लिप्त हैं। गिरोह सरगना गरीब लोगों से पहचान पत्र (आईडी) लेकर उनसे फर्जी सिम व बैंक खाते खोलकर अपराध को अंजाम देते हैं।

जल्द दो और वारदातों के खुलासे का दावा
एसपी सिटी ने दावा करते हुए कहा कि जिला साइबर यूनिट जल्द ही अंकुर पाठक के बैंक खाते से निकाले गए 2.50 लाख रुपये और रेलवे में टीटीई अनूप शुक्ला के खाते से 42 हजार रुपये निकालने वाले साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर लेगी।

कई प्रदेशों की झारखंड में पड़ी हैं पुलिस टीमें
झारखंड से लौटी साइबर टीम ने बताया कि वहां पर साइबर अपराधियों की धरपकड़ के लिए पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार आदि स्थानों की पुलिस टीमें लगी हुई हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि देश के अंदर साइबर क्राइम सबसे अधिक झारखंड में किया जा रहा है।

खुलासा करने वाले टीम को 10 हजार का इनाम
एसएसपी किरन एस ने साइबर क्राइम के पहले खुलासे पर टीम को 10 हजार रुपये के इनाम से पुरस्कृत किया है। पुरस्कृत टीम में आईपीएस अंशुल गुप्ता, इंस्पेक्टर बलजीत सिंह, आरक्षी संतोष कुमार व सतीश चंद्र हैं।

कैसे बचें साइबर क्राइम से
- कोई भी बैंक एटीएम से संबंधित किसी भी तरह की कोई जानकारी आदान-प्रदान नहीं करता। यदि कोई फोन पर पूछे तो जानकारी नहीं दें।
- बैंक क्रेडिट कार्ड में कोई भी कंपनी किसी भी तरह के डिस्काउंट की सूचना फोन पर नहीं देती और न ही कार्ड की जानकारी मांगती हैं।
- देश के अंदर कोई लाटरी की स्कीम नहीं चलती है, जितने भी इनाम निकलने के एसएमएस आते हैं, फर्जी होते हैं।
- पहचान पत्र जैसे वोटर कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि किसी को नहीं दें क्योंकि जालसाज इससे फर्जी सिम लेकर या फर्जी खाता खोलकर मुसीबत में डाल सकते हैं।
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साइबर अपराध होने पर क्या करें
यदि किसी कारण आप धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं, तो तत्काल बैंक जाकर या फोन करके एटीएम व बैंक खाता बंद करवाएं।
तत्काल साइबर अपराध शाखा में आकर सूचना दें ताकि खाते से निकाले गए रुपयों का दुरुपयोग रोका जा सके।
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