फरारी के बाद सरदार को हर बार भेदियों ने ही बचाया। उन्होंने पुलिस के हर मूवमेंट, आपरेशन की सूचना लीक की। आईजी कानपुर जोन आशुतोष पांडेय का कहना है कि कुछ पुलिस कर्मी व अधिकारियों की हमदर्दी की वजह से सरदार को गिरफ्तार करने में उत्तर प्रदेश पुलिस कामयाब नहीं हो सकी।
याद करें वर्ष 2014 में तत्कालीन सीओ क्राइम अविनाश कुमार गौतम को सटीक सूचना मिली कि प्रेमनगर के एक मकान में सरदार सिंह गुर्जर साथियों के साथ बैठा हुआ है। सूचना को काफी गोपनीय रखते हुए पुलिस कर्मियों को रात में पुलिस लाइन में एकत्रित किया गया। बिना कोई बात किए सीओ पुलिस कर्मियों को लेकर प्रेमनगर रवाना हो गए। एक स्थान पर गाड़ियों को रोक कर उन्होंने पुलिस कर्मियों को आपरेशन चलाने के बारे में जानकारी दी और पैदल-पैदल मुकाम की ओर चल दिए। इस बीच सरदार तक पुलिस की घेराबंदी की सूचना पहुंच गई। जैसे ही वह मौके पर पहुंचे वैसे ही एक पुलिस कर्मी दूसरे मकान में सरदार के होने की बात करते हुए घुस गया, जिसकी वजह से फोर्स भी अंदर घुस गई। तभी मौका पाकर बगल के मकान में छुपा सरदार पैदल अपने साथियों के साथ भाग गया। इसके बाद पुलिस ने बगल के घर में छापा मारा तो वहां सरदार के छुपे होने के संबंध में सबूत मिले।
यही नहीं, करीब छह माह पूर्व लखनऊ से आई एसटीएफ को सरदार सिंह के एक गांव में होने की सूचना मिली। इस दौरान एसटीएफ को कुछ पुलिस कर्मियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं, तो टीम ने उनके मोबाइल नंबर लिसनिंग पर लगा दिए। जैसे ही एसटीएफ रवाना हुई, वैसे ही सरदार तक एसटीएफ की घेराबंदी की सूचना पहुंच गई। टीम रास्ते में ही आपरेशन रोक कर लौटी और पुलिस कर्मी को कब्जे में लेकर उच्चाधिकारियों को बताया। जब तक एसटीएफ कानूनी कार्रवाई करती, तब तक राजनीतिक दखल शुरू हो गया। असहाय महसूस करके एसटीएफ बीच में ही आपरेशन छोड़कर चली गई। ऐसे ही तमाम मामले पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में हैं, जिससे स्पष्ट है कि भेदियों की वजह से पुलिस अपने मिशन में कामयाब नहीं हो सकी।